नई दिल्ली: दिल्ली के गांवों और किसानों के हक की लड़ाई अब तेज होती नजर आ रही है। दिल्ली पंचायत संघ ने दिल्ली सरकार के सामने कृषि भूमि का सर्कल रेट बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ करने की मांग रखी है। संघ ने दो टूक कहा कि दिवाली से पहले नई दरों की घोषणा की जाए और बढ़ा हुआ सर्कल रेट लागू होने तक किसानों की कृषि भूमि का नया अधिग्रहण न किया जाए।
किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग
दिल्ली पंचायत संघ के प्रमुख थान सिंह यादव ने कहा कि दिल्ली के किसानों की जमीन लंबे समय से पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम दरों पर अधिग्रहित किए जाने का मुद्दा उठता रहा है। किसानों की बेशकीमती जमीन का उचित मूल्य नहीं मिलना उनके साथ आर्थिक अन्याय है। उन्होंने कहा कि किसान की जमीन सिर्फ मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि उसकी रोजी-रोटी, परिवार की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य है।
पुरानी अधिग्रहित जमीन के मुआवजे की समीक्षा हो
संघ ने वर्ष 2000 से अब तक अधिग्रहित कृषि भूमि के मुआवजे की समीक्षा करने की भी मांग की। थान सिंह यादव के अनुसार लागू कानूनों और पात्रता के आधार पर किसानों को उचित बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा तथा अन्य देय लाभ मिलना चाहिए, ताकि जमीन गंवाने वाले परिवारों को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।
किसानों के धरने को समर्थन देगा पंचायत संघ
दिल्ली पंचायत संघ ने ऐलान किया कि वह किसानों के धरने में पहुंचकर उनके संघर्ष को समर्थन देगा। संघ ने दिल्ली देहात से जुड़े सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और अधिकारियों से राजनीतिक मतभेद भुलाकर किसानों की आवाज बुलंद करने की अपील की। संघ की प्रमुख मांगों में कृषि भूमि का सर्कल रेट 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ करना, नई दरें लागू होने से पहले अधिग्रहण रोकना, पुराने मुआवजे की समीक्षा करना और दिल्ली की विकास योजनाओं व बजट में ग्रामीण किसानों के हितों को उचित स्थान देना शामिल है।
Reported By: Pankaj Rai












