बिहार की बेटी भावना कंठ ने रचा इतिहास, FCL कोर्स पूरा करने वाली बनीं पहली महिला फाइटर पायलट

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पटना: बिहार की बेटी भावना कंठ ने भारतीय वायुसेना में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर देश का नाम रोशन किया है। वह फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) कोर्स पूरा करने वाली पहली महिला फाइटर पायलट बन गई हैं। इस उपलब्धि के साथ भावना ने सैन्य विमानन के क्षेत्र में महिलाओं के लिए एक नई मिसाल कायम की है। दरअसल दरभंगा जिले के घनश्यामपुर प्रखंड के बाउर गांव से ताल्लुक रखने वाली स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने अगस्त 2026 में मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (TACDE) में FCL कोर्स पूरा किया। यह भारतीय वायुसेना के सबसे चुनौतीपूर्ण युद्धक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल है।

इस प्रशिक्षण के बाद भावना अब युद्ध जैसी परिस्थितियों में हवाई अभियानों का नेतृत्व करने की क्षमता हासिल कर चुकी हैं। FCL कोर्स आमतौर पर ऐसे चुनिंदा फाइटर पायलटों के लिए होता है, जिनका युद्ध कौशल और प्रदर्शन बेहतरीन माना जाता है। इसी वजह से इस प्रशिक्षण से जुड़े पायलटों को अक्सर ‘टॉप गन’ कहा जाता है। फिलहाल भावना की तैनाती पंजाब में है।

बचपन से था आसमान में उड़ने का सपना

भावना कंठ का जन्म 1 दिसंबर 1992 को बिहार के बेगूसराय जिले के बरौनी में हुआ था। उनकी शुरुआती पढ़ाई डीएवी पब्लिक स्कूल, बरौनी से हुई। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।

उनके पिता तेज नारायण कंठ इंजीनियर हैं, जबकि मां राधा कंठ गृहिणी हैं। परिवार के मुताबिक, भावना को बचपन से ही आसमान में उड़ने का शौक था। वह पक्षियों की तरह खुले आसमान में उड़ने का सपना देखा करती थीं।

2015 में फाइटर स्ट्रीम में मिली एंट्री

भावना का सपना तब नई दिशा में आगे बढ़ा, जब 2015 में भारतीय वायुसेना ने महिलाओं के लिए फाइटर स्ट्रीम का रास्ता खोला। उन्होंने इस अवसर को अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया। कठिन प्रशिक्षण के बाद वर्ष 2016 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने उन्हें भारतीय वायुसेना में कमीशन प्रदान किया।

इसके बाद भावना फाइटर स्क्वाड्रन का हिस्सा बनीं और लगातार अपनी पेशेवर क्षमता साबित करती रहीं। NDA में जाने की इच्छा पूरी नहीं हो पाने के बावजूद उन्होंने सैन्य सेवा का सपना नहीं छोड़ा। आज FCL कोर्स पूरा कर उन्होंने उसी सपने को एक ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचा दिया है।

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