नई दिल्ली: आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई से होने जा रहा है. नौ दिनों तक चलने वाला यह पावन पर्व 23 जुलाई को दुर्गा नवमी के साथ संपन्न होगा. हिंदू धर्म में गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है. जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में देवी की दस महाविद्याओं की आराधना का विशेष विधान बताया गया है. यह पर्व विशेष रूप से साधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.
हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई तक चलेगी. इन नौ दिनों को देवी उपासना, मंत्र जाप, ध्यान और विशेष साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मेरु तंत्र और डामर तंत्र जैसे तांत्रिक ग्रंथों में भी गुप्त नवरात्रि का उल्लेख मिलता है. इन दिनों में की गई साधना को विशेष फलदायी माना जाता है.
क्यों खास मानी जाती है गुप्त नवरात्रि?
गुप्त नवरात्रि सामान्य नवरात्रि से कुछ अलग होती है. चैत्र और शारदीय नवरात्रि में जहां घर-घर कलश स्थापना, व्रत और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से गहन साधना और देवी की महाविद्याओं की उपासना के लिए जानी जाती है. यह पर्व विशेष रूप से तांत्रिक साधकों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. हालांकि, गृहस्थ भी पूरे श्रद्धा और नियम के साथ मां दुर्गा की पूजा, हवन, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं. ऐसी मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा से आध्यात्मिक शांति और देवी की कृपा प्राप्त होती है.
गुप्त नवरात्रि में होती है दस महाविद्याओं की पूजा
गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी के दस महाविद्या स्वरूपों की आराधना की जाती है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार ये सभी स्वरूप शक्ति के अलग-अलग रूपों का प्रतिनिधित्व करते हैं और इनकी साधना विशेष विधि से की जाती है.
दस महाविद्याओं के नाम इस प्रकार हैं-
मां काली
मां तारा
मां षोडशी (त्रिपुर सुंदरी)
मां भुवनेश्वरी
मां भैरवी
मां छिन्नमस्ता
मां धूमावती
मां बगलामुखी
मां मातंगी
मां कमला
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन महाविद्याओं की साधना विशेष नियमों और विधियों के अनुसार की जाती है. इसलिए ऐसी साधनाएं आमतौर पर अनुभवी साधकों द्वारा ही की जाती हैं.
सामान्य भक्त किस रूप की करें पूजा?
धार्मिक जानकारों के अनुसार सामान्य श्रद्धालुओं को गुप्त नवरात्रि के दौरान भी मां दुर्गा के पारंपरिक स्वरूपों की पूजा करना शुभ माना जाता है. भक्त पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना, मंत्र जाप और दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं. इन दिनों मां के जिन स्वरूपों की पूजा की जाती है, उनमें मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं. श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार व्रत भी रख सकते हैं.
मंदिरों में होंगे विशेष धार्मिक आयोजन
गुप्त नवरात्रि के दौरान देशभर के देवी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, हवन, दुर्गा पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन दिनों मंदिरों में पहुंचकर मां भगवती के दर्शन करते हैं और सुख, समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में पूरी श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ की गई देवी उपासना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है. इसलिए इन नौ दिनों को शक्ति साधना और देवी आराधना का अत्यंत पवित्र समय माना जाता है.











