नाग पंचमी 2026 की तारीख कन्फर्म! ऐसे करें नाग देवता और भगवान शिव की पूजा

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Nag Panchami 2026
Nag Panchami 2026

नई दिल्ली: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है और इसी महीने आने वाली नाग पंचमी का विशेष महत्व होता है. इस दिन नाग देवता और भगवान शिव की पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी पर विधि-विधान से पूजा करने से जीवन की अनेक परेशानियां दूर होती हैं, सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. यही वजह है कि हर साल लाखों श्रद्धालु इस पर्व का इंतजार करते हैं. अगर आप भी नाग पंचमी का व्रत या पूजा करने की योजना बना रहे हैं, तो पहले शुभ मुहूर्त, पूजा की सही विधि और इससे जुड़ी जरूरी धार्मिक मान्यताओं को जान लेना बेहद जरूरी है.

कब मनाई जाएगी नाग पंचमी 2026?

हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन (श्रावण) मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है. वर्ष 2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान शिव और नाग देवता की विशेष पूजा का विधान है.

पंचमी तिथि प्रारंभ: 16 अगस्त 2026, शाम 4:52 बजे

पंचमी तिथि समाप्त: 17 अगस्त 2026, शाम 5:00 बजे

पूजा का शुभ मुहूर्त: 17 अगस्त 2026, सुबह 6:04 बजे से 8:39 बजे तक

धार्मिक मान्यता है कि इस शुभ समय में पूजा करने से अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है और भगवान शिव के साथ नाग देवता का आशीर्वाद भी मिलता है.

नाग पंचमी पर इस तरह करें पूजा

नाग पंचमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद घर के पूजा स्थल या मुख्य द्वार के पास गोबर या मिट्टी से नाग देवता का प्रतीक बनाएं. यदि ऐसा संभव न हो तो नाग देवता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करके भी पूजा की जा सकती है. पूजन के दौरान नाग देवता को फूल, दूध, अक्षत और अन्य नैवेद्य अर्पित करें. धूप और दीप जलाकर विधिपूर्वक पूजा करें तथा श्रद्धा के साथ आरती करें. पूजा के अंत में नाग पंचमी की कथा सुनना या पढ़ना भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन की कई बाधाएं दूर होती हैं.

नाग पंचमी पर भगवान शिव की पूजा का महत्व

नाग पंचमी के अवसर पर भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करने के बाद कच्चा दूध अर्पित करना शुभ माना जाता है. पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है और भगवान शिव की कृपा बनी रहती है. जलाभिषेक के लिए तांबे के लोटे का उपयोग करना शुभ माना जाता है. श्रद्धालु इस दिन भगवान शिव से परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्ति की कामना करते हैं.

शिवलिंग पर क्या-क्या अर्पित करें?

नाग पंचमी के दिन शिवलिंग पर कई पूजन सामग्रियां अर्पित करने की परंपरा है. इनमें बेलपत्र, धतूरा, शहद, चंदन, अक्षत और कनेर के फूल प्रमुख हैं. पूजा के दौरान शिवलिंग पर त्रिपुंड बनाकर भगवान शिव से सुख, समृद्धि और सफलता की प्रार्थना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इन पूजन सामग्रियों को अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद देते हैं.

धार्मिक मान्यता और विशेष महत्व

नाग पंचमी केवल नाग देवता की पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का भी संदेश देता है. कई धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष के प्रभाव में कमी आती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. हालांकि, पूजा करते समय जीवित सांपों को पकड़कर उन्हें दूध पिलाने जैसी परंपराओं से बचना चाहिए. श्रद्धालु प्रतीक स्वरूप पूजा करके भी अपनी आस्था व्यक्त कर सकते हैं. इस तरह धार्मिक परंपराओं का पालन करने के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा का संदेश भी दिया जा सकता है.

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