नई दिल्ली: इजरायल के चुनाव से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा दांव चला है, जिसने सियासी हलचल बढ़ा दी है। ट्रंप ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के लिए अपना पूरा समर्थन देने का ऐलान किया है। उन्होंने नेतन्याहू को मजबूत, बहादुर और शानदार नेता बताया। इजरायल में 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव होने वाले हैं। ट्रंप ने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इजरायल के लोगों के नाम संदेश लिखा। इसमें उन्होंने कहा कि नेतन्याहू ने राजनीतिक जीवन के सबसे मुश्किल दौर में भी दबाव झेला और पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरे।
ट्रंप ने लिखा कि वे “बिबी” नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री चुने जाने के लिए पूरा समर्थन देते हैं। उन्होंने नेतन्याहू को ईरान के खिलाफ अमेरिका का मजबूत साझेदार बताया और कहा कि उन्होंने क्षेत्र में शांति की दिशा में काम किया है। साथ ही ट्रंप ने इजरायली जनता को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर उन्होंने नेतन्याहू के अलावा किसी और नेता को चुना, तो ईरान से निपटने की जिम्मेदारी अमेरिका को खुद उठानी पड़ सकती है। ट्रंप के मुताबिक, वे ऐसा करने के इच्छुक नहीं हैं।
नेतन्याहू ने जताया आभार
ट्रंप के समर्थन के बाद नेतन्याहू ने X पर वीडियो संदेश जारी कर उनका धन्यवाद किया। उन्होंने ट्रंप को अपना दोस्त बताया और कहा कि व्हाइट हाउस में इजरायल का उनसे बड़ा कोई समर्थक नहीं रहा। नेतन्याहू ने कहा कि दोनों देश मिलकर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। उन्होंने ट्रंप के साफ रुख, साहस और लगातार मिल रहे समर्थन की तारीफ की और लिखा कि दोनों मिलकर अपना मिशन पूरा करेंगे।
ईरान पर ट्रंप की चेतावनी
ट्रंप ने ईरान पर इजरायल और अमेरिका के प्रति लंबे समय से दुश्मनी रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य और आर्थिक ताकत को कमजोर किया गया है। उनकी चेतावनी थी कि अगर ईरान ने जल्द अपना रुख नहीं बदला, तो अमेरिका जल्द ही अभियान को पूरा कर देगा।
इजरायल और अमेरिका का ईरान के साथ संघर्ष करीब सात महीने से जारी है। इसका असर पश्चिम एशिया के कई देशों पर पड़ा है। ऊर्जा बाजार प्रभावित हुए हैं और क्षेत्र के अहम बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
क्या चुनाव में मिलेगा फायदा?
ट्रंप के समर्थन से नेतन्याहू को चुनाव में फायदा होगा या नहीं, यह कहना मुश्किल है। इजरायल में अमेरिकी राष्ट्रपति को लेकर लोगों के समर्थन में कमी की बात भी सामने आई है। ईरान के मुद्दे पर दोनों देशों की सरकारों के बीच मतभेदों की चर्चा भी रही है।
ओपिनियन पोल के मुताबिक, किसी भी नेता के लिए सरकार बनाने का रास्ता अभी साफ नहीं है। इजरायल में प्रधानमंत्री सीधे जनता के वोट से नहीं चुना जाता। लोग संसद के लिए प्रतिनिधि चुनते हैं और फिर अलग-अलग दलों के गठबंधन से सरकार बनती है।
27 अक्टूबर का चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद देश का पहला राष्ट्रीय चुनाव होगा। उस हमले के बाद इजरायल ने गाजा में युद्ध शुरू किया था, और फिर लेबनान तथा ईरान से जुड़े संघर्षों ने भी क्षेत्र के हालात को प्रभावित किया। इस चुनाव से तय होगा कि नेतन्याहू सत्ता में बने रहेंगे या मध्यमार्गी प्रतिद्वंद्वियों को सरकार बनाने का मौका मिलेगा।
विदेशी चुनावों में पहले भी समर्थन दे चुके हैं ट्रंप
ट्रंप ने दूसरे देशों के चुनावों में खुलकर उम्मीदवारों का समर्थन करके अमेरिकी परंपरा से अलग रुख अपनाया है। वे हंगरी, कोलंबिया, अर्जेंटीना, जापान और होंडुरास समेत कई देशों में नेताओं या उम्मीदवारों का समर्थन कर चुके हैं। नेतन्याहू के लिए उनका ताजा बयान भी इसी सिलसिले की कड़ी माना जा रहा है।












