कीमतों में आई इस कमजोरी के बाद निवेशकों के सामने सवाल है कि क्या मौजूदा स्तर पर खरीदारी करनी चाहिए या बाजार में और गिरावट का इंतजार करना बेहतर होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, डॉलर में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में तनाव जैसे कारक कीमती धातुओं के कारोबार को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में बाजार के जानकार आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा तय करने वाले संकेतों पर नजर रख रहे हैं। निवेशकों की निगाह अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक पर है, जो 27 और 28 अक्टूबर को निर्धारित बताई गई है। इस बैठक में ब्याज दरों को लेकर होने वाले फैसले का असर सोने और चांदी सहित कई वित्तीय संपत्तियों पर पड़ सकता है।
इसके अलावा अमेरिका के महंगाई संबंधी आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में भूमिका निभा सकते हैं। जब ब्याज दरें बढ़ने की संभावना मजबूत होती है, तो निवेशक ऐसी संपत्तियों में पैसा लगाने को लेकर अधिक सतर्क हो सकते हैं, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता। सोना और चांदी इसी श्रेणी में आते हैं। हालांकि, कीमतों पर असर केवल ब्याज दरों से नहीं पड़ता, बल्कि डॉलर की चाल, वैश्विक मांग और भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण होते हैं।
सोना-चांदी सस्ते होने के पीछे क्या कारण हैं?
अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकती है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में अक्टूबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना कम मानी जा रही थी, जबकि दिसंबर में दरों में बढ़ोतरी को लेकर अनुमान ज्यादा था। रिपोर्ट में अक्टूबर के लिए करीब 16 प्रतिशत और दिसंबर के लिए 90 प्रतिशत संभावना का उल्लेख किया गया है। ये आंकड़े बाजार के उस समय के अनुमानों को दर्शाते हैं, न कि किसी निश्चित फैसले को।
निवेशक ब्याज दरों की दिशा का आकलन करते हुए सोने और चांदी में अपनी हिस्सेदारी घटा या बढ़ा सकते हैं। इसी वजह से महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंक के संकेतों के समय कीमतों में तेज बदलाव देखने को मिल सकता है।
पश्चिम एशिया का तनाव भी बाजार को प्रभावित कर रहा है
वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम भी सोने और चांदी के कारोबार पर असर डाल सकते हैं। रिपोर्ट में सऊदी अरब के शायबाह तेल क्षेत्र में एक संयंत्र को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किए जाने की खबर का उल्लेख है। ऐसे घटनाक्रम से निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है और कच्चे तेल, डॉलर तथा कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव आ सकता है।
हालांकि, किसी एक घटना को कीमतों में गिरावट का अकेला कारण मानना सही नहीं होगा। बाजार की चाल कई आर्थिक और राजनीतिक कारकों के संयुक्त प्रभाव से तय होती है। निवेशकों को इसलिए किसी एक खबर के आधार पर जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए।
दिवाली तक और गिरावट की संभावना जता रहे बाजार विशेषज्ञ
केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया के अनुसार, दिवाली तक सोने और चांदी की कीमतों में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। उनके अनुमान के मुताबिक, सोने का भाव 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे जा सकता है, जबकि चांदी करीब 1.90 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि निकट अवधि में दोनों धातुओं के भाव में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ये अनुमान हैं, निश्चित भविष्यवाणी नहीं। वास्तविक कीमतें वैश्विक घटनाओं, डॉलर सूचकांक, कच्चे तेल और निवेशकों की खरीद-बिक्री पर निर्भर करेंगी।
अभी खरीदें, बेचें या निवेश रोककर रखें?
अजय केडिया के मुताबिक, लंबी अवधि के निवेशक कीमतों में गिरावट के दौरान एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध खरीदारी पर विचार कर सकते हैं। नियमित अंतराल पर निवेश करने की रणनीति से खरीद की औसत लागत को संतुलित करने में मदद मिल सकती है, लेकिन इससे नुकसान न होने की गारंटी नहीं मिलती। वहीं, कम समय में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए बाजार में स्थिरता के संकेतों का इंतजार करना उपयोगी हो सकता है। सोना और चांदी खरीदने का फैसला व्यक्ति के निवेश लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और पैसों की जरूरत पर निर्भर करता है।
निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
सोने-चांदी की कीमतों में आई गिरावट को अपने आप खरीदारी का सबसे अच्छा अवसर नहीं माना जाना चाहिए। निवेश करने से पहले बाजार की मौजूदा स्थिति, खरीदने का उद्देश्य और निवेश की अवधि समझना जरूरी है। आभूषण खरीदने वालों को बाजार भाव के साथ मेकिंग चार्ज और अन्य लागू लागतों की भी जानकारी लेनी चाहिए। निवेश के लिए धातु खरीदने वालों को कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव और नुकसान की संभावना को ध्यान में रखना चाहिए। किसी भी निर्णय से पहले विश्वसनीय बाजार जानकारी और जरूरत के अनुसार वित्तीय सलाह लेना बेहतर रहेगा।












