पालवंचा: तेलंगाना का पालवंचा शहर, जिसे ‘पॉवर सिटी’ के नाम से भी जाना जाता है, इस बार गणेश चतुर्थी पर एक अनोखे और भव्य नजारे का गवाह बना। यहां दो अलग-अलग गणेश पंडालों को साधारण फूलों या रोशनी से नहीं, बल्कि पूरे 2 करोड़ 90 लाख रुपये के असली नोटों से सजाया गया। जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, नोटों से सजे बप्पा की एक झलक पाने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं का तांता लग गया।
इस शानदार सजावट के पीछे दो अलग-अलग समुदायों की मेहनत है। कापू समुदाय ने अपने पंडाल में भगवान गणेश की मूर्ति को 1.40 करोड़ रुपये के नोटों से सजाया, तो वहीं युवाओं के संगठन ‘टीम एकदंत’ ने 1.50 करोड़ रुपये के बिल्कुल नए नोटों से दूसरी मूर्ति का श्रृंगार करवाया। आयोजकों ने बताया कि इस भव्य सजावट के लिए स्थानीय व्यापारियों ने आगे बढ़कर चंदा इकट्ठा किया था। इसके बाद बैंकों की मदद लेकर इन पैसों के बदले पूरी तरह नए और फ्रेश करेंसी नोट हासिल किए गए, ताकि सजावट और भी खूबसूरत नजर आए।
गजपति थीम ने बढ़ाई रौनक
सिर्फ नोटों की सजावट ही नहीं, बल्कि इस बार पंडालों को और आकर्षक बनाने के लिए एक खास गजपति थीम भी तैयार की गई है, जो हर आने वाले भक्त का मन मोह रही है। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच चल रहा यह उत्सव पूरे इलाके में त्योहार की रौनक को दोगुना कर रहा है। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब पालवंचा में ऐसी शानदार सजावट देखने को मिली हो। इससे पहले साल 2023 में भी एक गणपति पंडाल को सजाने के लिए 1 करोड़ रुपये के नोटों का इस्तेमाल किया गया था। नोटों से बप्पा को सजाने की यह अनोखी परंपरा यहां हर साल और भव्य होती जा रही है।
पिछले साल भी बना था रिकॉर्ड
अगर पिछले साल यानी 2024 की बात करें, तो कापू संघम गणेश उत्सव समिति ने अंबेडकर सेंटर में गणेश जी की मूर्ति और पूरे मंडप को 1.10 करोड़ रुपये के नए नोटों से सजाया था। उस दौरान 500, 200 और 100 रुपये के नोटों को बड़ी कुशलता से मोड़कर फूलों जैसे डिजाइन बनाए गए थे और मूर्ति को नोटों की एक विशाल माला भी पहनाई गई थी। इसी तरह मोर सुपरमार्केट के पास बने एक अन्य गणेश मंडप को भी कापू संघम ने 1.50 करोड़ रुपये के नोटों से सजाया था।
अंबेडकर सेंटर में यह भव्य आयोजन करने वाले कापू समुदाय के इस समूह का बप्पा से नाता काफी पुराना है। यह समूह पिछले 28 सालों से लगातार इसी जगह पूरी श्रद्धा के साथ गणेश जी की स्थापना करता आ रहा है, और यही सालों पुरानी परंपरा आज पालवंचा के गणेश उत्सव को देशभर में एक खास पहचान दिला रही है।












