नई दिल्ली: एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार पुलिस के शिकंजे में आए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत एहतियाती कार्रवाई शुरू की है। अब सबकी नजर इस पर है कि अदालत में क्या फैसला होता है। दीपके को शनिवार को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया जाना है।
दूसरी ओर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद रिहा कर दिया गया है।
इस घटनाक्रम से एक सवाल फिर उठ खड़ा हुआ है। क्या दीपके को भी CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की तरह तिहाड़ जेल जाना पड़ेगा? इन दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई के बाद पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। हालांकि, दीपके के मामले में अदालत का फैसला आना अभी बाकी है।
कैसे हुई हिरासत
शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दीपके “लहरा दो तिरंगा” प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। दिल्ली पुलिस ने उन्हें झंडेवालान इलाके से हिरासत में ले लिया। वे कनॉट प्लेस की ओर जा रहे थे, जहां प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। इसी दौरान नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार, कानून-व्यवस्था और यातायात बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया गया। हिरासत के बाद CJP ने दीपके की स्थिति और ठिकाने को लेकर सवाल उठाए।
संगठन का आरोप था कि उनके परिवार, वकीलों और पार्टी के लोगों को लंबे समय तक उनसे संपर्क करने में दिक्कत हुई। वहीं, दिल्ली पुलिस ने बताया कि उनके खिलाफ BNSS की धारा 126 और 170 के तहत एहतियाती कार्रवाई की गई है और उन्हें SEM अदालत में पेश किया जाएगा।
पहले भी हुई थी हिरासत
यह पहला मौका नहीं है। कुछ दिन पहले भी दीपके को हिरासत में लिया गया था। 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उन्हें सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ पकड़ा गया था। अगले दिन तीनों को SEM अदालत के सामने पेश किया गया। इसके बाद 50-50 हजार रुपये के जमानत-सह-मुचलके पर उनकी रिहाई हुई। इस बॉन्ड के तहत तीनों ने एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छा आचरण करने की शर्त मानी थी। अब नई कार्रवाई को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।












