नई दिल्ली: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने पहाड़ी इलाकों में ऐसी तबाही मचाई कि कई गांव, सड़कें और परियोजना स्थल देखते ही देखते मलबे में बदल गए. अब प्लैनेट लैब्स की शुरुआती सैटेलाइट तस्वीरों ने इस आपदा की भयावहता को साफ तौर पर सामने ला दिया है. इस हादसे में अब तक 150 से ज्यादा लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं.
नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एनडीआरआरएमए के अनुसार, रसुवागढ़ी सीमा चौकी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में ग्लेशियर क्षेत्र के पास बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर गिर गया. आशंका है कि यह मलबा किसी हिमनदी झील में गिरा या फिर नदी का रास्ता रुक गया. इसके बाद बर्फ, पिघले पानी और भारी मलबे से भरी तेज लहर लेंडे खोला के रास्ते भोटे कोशी नदी में पहुंच गई और देखते ही देखते आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया.
25 और 26 अगस्त की तस्वीरों में बड़ा अंतर
सैटेलाइट वीडियो में 25 और 26 अगस्त की तस्वीरों को साथ रखकर दिखाया गया है. इनमें बाढ़ आने से पहले और उसके बाद की स्थिति में साफ अंतर दिखाई देता है. जिन इलाकों में पहले सामान्य भू-भाग और निर्माण नजर आ रहे थे, वहां बाढ़ के बाद भारी बदलाव दिखा.
गांव, सड़कें और परियोजनाएं बही
बुधवार सुबह करीब 9 बजे भोटे कोशी नदी में अचानक इस बाढ़ ने कई गांवों को नुकसान पहुंचाया. सड़कें और जलविद्युत परियोजनाएं भी इसकी चपेट में आ गईं. अधिकारियों के मुताबिक, भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और मलेशिया समेत कई देशों के 291 पर्यटकों सहित कुल 384 पर्यटक लापता हैं. इनमें 133 भारतीयों के भी लापता होने की बात कही गई है. बताया जा रहा है कि कई लोग कैलाश पर्वत की तीर्थयात्रा के लिए तिब्बत की ओर गए थे.
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से बात कर भारत की ओर से हर संभव सहायता देने की पेशकश की. मोदी ने कहा कि भारत नेपाल के साथ खड़ा है और बचाव व राहत कार्यों में सहयोग के लिए तैयार है. गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में भी इसी इलाके में अचानक बाढ़ आई थी. तब तिब्बत में एक हिमनदी झील के उफान पर आने से नौ लोगों की मौत हुई थी और नेपाल-चीन को जोड़ने वाला अहम पुल समेत कई ढांचों को नुकसान पहुंचा था.












