नई दिल्ली: अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के निदेशक जॉन रैटक्लिफ की रूस यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई हलचल पैदा कर दी है. रैटक्लिफ 25 अगस्त को बेहद गोपनीय तरीके से मॉस्को पहुंचे. उनकी मौजूदगी का पता तब चला, जब एयरपोर्ट पर अमेरिकी C-17 सैन्य विमान और बाद में अमेरिकी राजनयिक काफिला देखा गया. CIA प्रमुख बनने के बाद रूस का यह उनका पहला ऐसा दौरा बताया जा रहा है. हालांकि, उनकी मुलाकात राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से नहीं हुई.
रैटक्लिफ का मॉस्को दौरा इतना गुप्त रखा गया था कि इसकी जानकारी पहले सार्वजनिक नहीं हुई. रूस के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बुधवार को बताया कि रैटक्लिफ ने रूसी खुफिया अधिकारियों के साथ बातचीत की. इसके साथ ही पेस्कोव ने कहा कि पुतिन को रैटक्लिफ और रूसी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत की जानकारी दी गई थी.
NATO को लेकर अमेरिका की चिंता
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस यात्रा के पीछे एक अहम उद्देश्य रूस को NATO देशों के खिलाफ किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई से दूर रहने का संदेश देना हो सकता है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि रूस NATO की एकजुटता और अमेरिका की प्रतिक्रिया को परखने के लिए सीधे युद्ध से कम स्तर की कार्रवाई कर सकता है. यूरोप में रूस की गतिविधियों को लेकर अमेरिका की चिंता लगातार बढ़ी है. रोमानिया में ड्रोन घुसने और पोलैंड के ऊपर रूसी मिसाइल से जुड़ी घटनाओं ने NATO देशों के बीच सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ाया है.
ईरान और होर्मुज पर भी चर्चा
रैटक्लिफ की बातचीत में ईरान और होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा भी शामिल होने की खबर है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उन्होंने संकेत दिया कि अगर होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं होती है, तो अमेरिका ईरान पर नए प्रतिबंध लगा सकता है.
ट्रंप ने बताया ‘सेमी-रूटीन’ दौरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रैटक्लिफ की रूस यात्रा की पुष्टि की है. उन्होंने इसे ‘सेमी-रूटीन’ दौरा बताते हुए कहा कि इससे रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने की कोशिशों में कुछ प्रगति हो सकती है. वहीं, CIA ने अब तक यात्रा के वास्तविक उद्देश्य को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी नहीं दी है. इसी वजह से मॉस्को में हुई इस गोपनीय मुलाकात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं.












