नई दिल्ली: अपराध की दुनिया में कुछ मामले ऐसे होते हैं जो इंसान की सोच और सामाजिक व्यवस्था को झकझोर कर रख देते हैं। ब्रिटेन की एक अति-सुरक्षित जेल में बंद रॉबर्ट मौड्सली नाम का एक ऐसा ही कैदी पिछले 52 सालों से सलाखों के पीछे है। मार्च 1974 में महज 20 साल की उम्र में पहली हत्या करने वाले मौड्सली को ब्रिटेन का सबसे लंबे समय तक जेल में रहने वाला कैदी माना जाता है। उसने जेल के अंदर रहते हुए तीन और कैदियों को मौत के घाट उतार दिया। अब 70 की उम्र पार कर चुके इस खूंखार अपराधी की जिंदगी में 71 साल की एक महिला की एंट्री हुई है, जिससे उसे प्यार हो गया है। यह अनोखा रिश्ता केवल फोन कॉल और चिंताओं से भरी चिट्ठियों तक ही सीमित है।
ब्रिटेन के सबसे खतरनाक कैदी की कहानी
मौड्सली के आपराधिक जीवन की शुरुआत लंदन में जॉन फैरेल की हत्या से हुई थी। अदालत में मौड्सली ने दावा किया था कि फैरेल ने उसे बच्चों के यौन शोषण की तस्वीरें दिखाई थीं।
इस मामले में अदालत ने उसे सीधे हत्या के बजाय मानसिक स्थिति को देखते हुए ‘कम जिम्मेदारी’ के आधार पर गैर-इरादतन हत्या का दोषी माना। इसके बाद उसे ब्रॉडमूर स्थित हाई-सिक्योरिटी मानसिक स्वास्थ्य संस्था में भेज दिया गया, लेकिन उसका खूनी सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ।
जेल की सलाखों के भीतर तीन और हत्याएं
ब्रॉडमूर संस्था में रहते हुए मौड्सली ने एक अन्य कैदी के साथ मिलकर फ्रांसिस नाम के शख्स की हत्या कर दी, जो बच्चों के यौन शोषण का आरोपी था। इस घटना के बाद उसे सख्त सुरक्षा वाली वेकफील्ड जेल में स्थानांतरित किया गया। वर्ष 1978 में उसने वेकफील्ड जेल के अंदर ही दो और कैदियों, सैल्नी डारवुड और विलियम रॉबर्ट्स को बेरहमी से मार डाला।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उसके ये सभी शिकार यौन अपराधों या महिलाओं और बच्चों के खिलाफ गंभीर जुर्म में लिप्त थे। डारवुड अपनी पत्नी की हत्या का दोषी था, जबकि रॉबर्ट्स पर एक लड़की से दुष्कर्म के प्रयास और हत्या का आरोप था।
बलात्कारियों के खिलाफ नफरत
मौड्सली की मानसिकता का सबसे जटिल पहलू यह है कि वह केवल यौन अपराधियों और बलात्कारियों को ही निशाना बनाता है। उसका स्पष्ट कहना है कि यदि उसे कभी जेल से बाहर निकाला गया और उसका सामना किसी ऐसे व्यक्ति से हुआ जिसने किसी का यौन शोषण किया हो, तो वह उसकी हत्या करने से पीछे नहीं हटेगा। वह खुद इस बात को स्वीकार करता है कि समाज की सुरक्षा और उसके अपने स्वभाव को देखते हुए उसका पूरी जिंदगी जेल में ही बीत जाना सबसे बेहतर है। आज भी जेल की बेहद सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच बंद मौड्सली सिर्फ उस महिला से एक बार सामने से मिलना चाहता है जो उसकी जिंदगी का एकमात्र सहारा बनी है। अपराध, सजा और इंसानी अहसासों के बीच झूलती यह कहानी कानून और मनोविज्ञान के लिए एक बड़ी पहेली बनी हुई है।












