नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले महीने NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस ज्यादती के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने पूरे मामले की जांच के लिए एक हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) का गठन किया है।
कौन करेगा जांच? सुप्रीम कोर्ट ने किन्हें सौंपी जिम्मेदारी
इस कमेटी के प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी होंगे। पैनल में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, CBI के पूर्व डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व DGP एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कमेटी सदस्यों की विशेषज्ञता, अनुभव और विविधता को देखकर बनाई गई है। कोर्ट को भरोसा है कि पैनल की सिफारिशें पूरे मामले का व्यापक आकलन करने में मदद करेंगी।
ये सिर्फ एक बार की जांच नहीं होगी
कोर्ट ने साफ किया कि HPC की जांच कोई फॉर्मेलिटी नहीं होगी। यह लगातार और समय-समय पर मुद्दों का आकलन करेगी और कोर्ट को अंतरिम रिपोर्ट सौंपती रहेगी। इससे कोर्ट को जरूरत पड़ने पर तुरंत निर्देश देने में मदद मिलेगी। पैनल प्रदर्शनकारियों की कथित हिंसा और पुलिस के बल प्रयोग, दोनों की जांच करेगा।
पैनल किन-किन चीजों की जांच करेगा?
सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को कई अहम बिंदुओं पर जांच के निर्देश दिए हैं। महिला प्रदर्शनकारियों पर टारगेटेड हिंसा: कोर्ट ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ उत्पीड़न, छेड़छाड़ और टारगेटेड हिंसा के आरोपों को प्राथमिकता दी जाए।
बल प्रयोग कितना जायज था? पैनल देखेगा कि पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने प्रदर्शनकारियों पर गंभीर चोटें पहुंचाई हैं या नहीं। चेन ऑफ कमांड, जिम्मेदार अफसर और बल प्रयोग के दौरान कानून और नियमों का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी जांच होगी।
बिना चेतावनी के पेलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के आरोपों का आकलन किया जाएगा। कोर्ट ने ये भी पूछा है कि क्या विरोध के दौरान पुलिस की प्रतिक्रिया उचित और नपी-तुली थी।
साथ ही पंप-एक्शन गन से दागे जाने वाले मेटल प्रोजेक्टाइल और पेलेट पर बैन लगाने की संभावना पर भी विचार होगा। वर्दी, नेमप्लेट और निगरानी: कमेटी ये भी जांचेगी कि गिरफ्तारी और बल प्रयोग के दौरान पुलिसकर्मियों ने सही वर्दी और नेमप्लेट पहनी थी या नहीं।
प्रदर्शनकारियों की निगरानी और सर्विलांस क्या निजता और शांतिपूर्ण सभा के संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप था, इसे भी देखा जाएगा। इसके अलावा दोनों पक्षों में घायल लोगों के लिए अंतरिम मुआवजे पर भी विचार किया जाएगा।












