मेरठ: उत्तर प्रदेश के सिवाया गांव में रविवार को इंसानियत और आपसी भाईचारे की ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया. दिल्ली-देहरादून हाईवे पर कांवड़ियों की भारी भीड़ के बीच जब एक मुस्लिम युवक का जनाजा कब्रिस्तान ले जाने में परेशानी हुई, तो शिवभक्तों ने खुद आगे आकर रास्ता बनवाया.
हार्ट अटैक से हुई युवक की मौत
सिवाया गांव निवासी 40 वर्षीय निजाम की रविवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई. परिजनों के मुताबिक, हार्ट अटैक के कारण उनकी मौत हो गई. इसके बाद परिवार के लोग जनाजे को सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए कब्रिस्तान ले जाने की तैयारी में जुट गए.
गांव का कब्रिस्तान हाईवे के दूसरी तरफ है. उसी समय कांवड़ यात्रा के चलते दिल्ली-देहरादून हाईवे पर शिवभक्तों की भारी भीड़ गुजर रही थी. ऐसे में जनाजे को सड़क पार कराना परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गया.
पुलिस के पहुंचते ही सामने आया भाईचारा
ग्रामीणों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी. दौराला थाना प्रभारी सुमन कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस की मौजूदगी में जब जनाजा हाईवे के पास पहुंचा, तो वहां मौजूद कांवड़ियों को पूरी स्थिति की जानकारी हुई.
इसके बाद कुछ कांवड़ियों ने बिना किसी निर्देश का इंतजार किए खुद आगे बढ़कर भीड़ को रोकने की पहल की. उन्होंने बाकी शिवभक्तों को कुछ देर रुकने का इशारा किया, ताकि जनाजा सुरक्षित तरीके से सड़क पार कर सके.
कांवड़ियों ने बनाई इंसानी चेन
कुछ कांवड़िये हाईवे पर एक-दूसरे का हाथ थामकर खड़े हो गए और एक तरह से इंसानी चेन बना ली. हजारों की संख्या में मौजूद कांवड़िये शांतिपूर्वक वहीं रुक गए. इस दौरान जनाजे को सम्मान के साथ हाईवे पार कराया गया और उसे कब्रिस्तान की ओर ले जाया गया.
जनाजा पूरी तरह सड़क पार कर जाने के बाद ही कांवड़ियों ने अपनी यात्रा दोबारा शुरू की. इसके बाद शिवभक्त हर-हर महादेव का जयघोष करते हुए अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गए.
इलाके में हो रही पहल की तारीफ
कांवड़ियों की इस पहल की स्थानीय लोगों ने जमकर सराहना की. लोगों का कहना है कि इस घटना ने धार्मिक सौहार्द, इंसानियत और आपसी सम्मान की मिसाल पेश की है. भारी भीड़ के बीच कुछ समय के लिए रास्ता रोककर जनाजे को सम्मानपूर्वक रास्ता देना समाज में भाईचारे और सद्भाव का मजबूत संदेश देता है.











