NRI शादी से क्यों डर रहीं भारतीय लड़कियां? Reddit पोस्ट में सामने आई बड़ी वजह

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NRI wedding
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नई दिल्ली: एक समय था जब भारतीय परिवारों में अनिवासी भारतीय यानी एनआरआई (NRI) दूल्हे की मांग सबसे अधिक हुआ करती थी. विदेश में बसने का सपना, बेहतर जीवनशैली और आर्थिक सुरक्षा की उम्मीद में लोग एनआरआई युवकों के साथ अपनी बेटियों के रिश्ते को पहली प्राथमिकता देते थे. हालांकि, पिछले कुछ समय में यह धारणा तेजी से बदली है. अब भारतीय शादी के बाजार में ‘विदेशी ठप्पे’ से ज्यादा जीवन साथी के साथ तालमेल, करियर और मानसिक शांति को महत्व दिया जा रहा है.

वीजा संकट और घटती दिलचस्पी

इमिग्रेशन से जुड़ी एक रिपोर्ट VisaVerge के अनुसार, अमेरिका में रहने वाले एनआरआई युवकों के प्रति भारतीय परिवारों की दिलचस्पी में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे केवल वीजा नियमों की सख्ती ही नहीं, बल्कि कई अन्य व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं. अमेरिका जैसे देशों में बदलते इमिग्रेशन नियम, जीवनसाथी के लिए काम करने के अधिकार में अनिश्चितता और विदेश में स्थायी रूप से बसने को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने भारतीय परिवारों को पुनर्विचार करने पर मजबूर कर दिया है.

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट (Reddit) पर इस विषय को लेकर एक विस्तृत चर्चा देखने को मिली. एक यूजर ने सवाल उठाया कि क्या वाकई भारत में एनआरआई युवकों के लिए रिश्ता ढूंढना अब पहले से ज्यादा कठिन हो गया है?
पोस्ट में जिक्र किया गया कि कई मामलों में स्थिर करियर और अच्छी कमाई होने के बावजूद एनआरआई युवकों को केवल पुरानी धारणाओं के आधार पर खारिज कर दिया जाता है. इनमें यह आशंका शामिल होती है कि विदेश में रहने के कारण पति वफादार नहीं रहेगा, शादी के बाद उसके व्यवहार में बदलाव आ सकता है या वहां अकेलापन सहना पड़ेगा.

कामकाजी महिलाओं का बदला नजरिया

इस मुद्दे पर भारतीय महिलाओं और अन्य सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने बेहद व्यावहारिक प्रतिक्रियाएं दी हैं. चर्चा का मुख्य बिंदु भारत में महिलाओं की वित्तीय आत्मनिर्भरता रही.

करियर से समझौता: भारत में अच्छी नौकरी कर रही महिलाओं का मानना है कि केवल शादी के लिए अपना जमा-जमाया करियर छोड़कर विदेश जाना समझदारी नहीं है, खासकर तब जब वहां नौकरी मिलने की कोई गारंटी न हो.

जीवनशैली और घरेलू मदद: कई उपयोगकर्ताओं ने ध्यान दिलाया कि भारत में कामकाजी महिलाओं को आसानी से घरेलू मदद और सामाजिक सहयोग मिल जाता है, जबकि विदेश में नौकरी न मिलने पर उन्हें अकेलापन और घर के कामकाज का पूरा बोझ उठाना पड़ सकता है.

जांच-परख की बढ़ती जरूरत

विशेषज्ञों और उपयोगकर्ताओं का यह भी कहना है कि सभी एनआरआई युवकों को एक ही नजरिए से देखना सही नहीं है. आज के समय में शादी जैसा अहम फैसला लेने से पहले दोनों पक्षों को एक-दूसरे की पृष्ठभूमि की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए. परिवार के स्तर पर आपसी बातचीत और सही जानकारी जुटाना किसी भी रिश्ते की सफलता के लिए अनिवार्य माना जा रहा है.

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