सुप्रीम कोर्ट की पहल रंग लाएगी? ज्ञानवापी विवाद पर आज होगी अहम वार्ता

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Gyanvapi Case Mediation Begins Today
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वाराणसी: बहुचर्चित ज्ञानवापी मामले में एक अहम मोड़ आया है. सुप्रीम कोर्ट की पहल पर शुरू की गई मध्यस्थता प्रक्रिया में अब मुस्लिम पक्ष भी शामिल होने के लिए तैयार हो गया है. पहले इस प्रक्रिया से दूरी बनाने की बात कहने वाली अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद ने बातचीत के बाद अपना रुख बदला है. अब उसके अधिवक्ता मंगलवार को होने वाली बैठक में हिस्सा लेकर अपना पक्ष रखेंगे.

सुप्रीम कोर्ट की पहल पर होगी मध्यस्थता

ज्ञानवापी विवाद से जुड़े मामलों के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत जिला न्यायालय ने इन मुकदमों को मध्यस्थता केंद्र भेजा है. सभी पक्षों को नोटिस जारी कर बैठक में शामिल होने के लिए कहा गया है. इस प्रक्रिया का उद्देश्य अदालत के बाहर आपसी बातचीत के जरिए समाधान की संभावना तलाशना है.

इनकार के बाद बदला फैसला

सोमवार को अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद की ओर से जारी एक पत्र में कहा गया था कि वह मध्यस्थता प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेगा. हालांकि, बाद में संगठन के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं के बीच हुई चर्चा के बाद फैसला बदला गया. अब मुस्लिम पक्ष की ओर से अधिवक्ता बैठक में शामिल होकर अपना पक्ष रखेंगे.

तीन सदस्यीय समिति करेगी सुनवाई

ज्ञानवापी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मध्यस्थता की जिम्मेदारी एडीजे-षष्ठम् की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति को सौंपी गई है. बैठक के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे और सभी पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी.

कई मामलों पर होगी चर्चा

मध्यस्थता के दौरान ज्ञानवापी परिसर से जुड़े कई लंबित मामलों पर चर्चा हो सकती है. इनमें शृंगार गौरी में पूजा-अर्चना की मांग, परिसर के विभिन्न हिस्सों के सर्वेक्षण, व्यास परिवार से जुड़े दावे और अन्य कानूनी विवाद शामिल हैं. उद्देश्य यह देखना है कि किन मुद्दों पर आपसी सहमति की संभावना बन सकती है.

कानूनी समाधान पर जोर

कुछ पक्ष अब भी मध्यस्थता के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन अधिकांश लोगों का मानना है कि इतने संवेदनशील मामले का समाधान कानून के दायरे में ही होना चाहिए. मुस्लिम पक्ष ने भी साफ किया है कि वह अपने कानूनी अधिकारों का सम्मान करते हुए अदालत की प्रक्रिया में सहयोग करेगा.

ज्ञानवापी विवाद लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन है. ऐसे में मध्यस्थता की यह पहल भविष्य में किसी सहमति की दिशा में पहला कदम साबित हो सकती है, हालांकि अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा.

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