गैस सिलेंडर सब्सिडी पर बड़ा अपडेट! 7 दिन के अंदर पूरा करें ये जरूरी काम

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LPG Gas
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नई दिल्ली: अगर आपको अभी LPG सब्सिडी मिल रही है और आपकी इनकम ज्यादा है, तो अपने फोन के इनबॉक्स पर नजर रखें. ऐसा इसलिए है क्योंकि गैस एजेंसियां किसी भी समय आपकी सब्सिडी बंद कर सकती हैं. आइए इसे विस्तार से समझते हैं.

केंद्र सरकार ने उठाए सख्त कदम

दुनिया भर में एनर्जी की बढ़ती कीमतों और सरकारी खजाने पर बढ़ते बोझ के बीच केंद्र सरकार ने कुकिंग गैस (LPG) सब्सिडी को लेकर एक अहम और सख्त कदम उठाया है. अब, सरकारी तेल कंपनियां जिन्हें ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) कहा जाता है, जैसे इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL), और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL), इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के डेटा का इस्तेमाल करके उन लोगों की पहचान कर रही हैं जो सब्सिडी पाने के हकदार नहीं हैं. पहचान होने के बाद ये कंपनियां जल्द से जल्द इन लोगों की सब्सिडी बंद कर देंगी. अगर किसी ग्राहक को लगता है कि वे सच में सब्सिडी के हकदार हैं तो उन्हें अपील करने के लिए 7 दिन का समय दिया जाएगा. 

नए नियम क्या हैं?

सरकार उन ग्राहकों की सब्सिडी बंद करने की तैयारी कर रही है जिनकी सालाना इनकम 10 लाख या उससे ज्यादा है. सरकार का कहना है कि अमीर परिवारों को सब्सिडी देने के बजाय इन पैसों का इस्तेमाल गरीबों की मदद करने और देश की एनर्जी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए. इस मकसद को पूरा करने के लिए, तेल कंपनियों ने ये कदम उठाए हैं.

SMS के जरिए चेतावनी

कंपनियों ने उन ग्राहकों को टेक्स्ट मैसेज भेजना शुरू कर दिया है जिनके टैक्स रिकॉर्ड से पता चलता है कि उनकी कुल टैक्सेबल इनकम या उनके परिवार के किसी सदस्य की इनकम तय सीमा से ज्यादा है. मैसेज में साफ तौर पर कहा गया है कि अगर किसी ग्राहक को लगता है कि यह डेटा गलत है तो वे 7 दिनों के अंदर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं. ऐसा न करने पर उनकी गैस सब्सिडी हमेशा के लिए बंद कर दी जाएगी. ग्राहक कंपनियों की टोल-फ्री हेल्पलाइन पर संपर्क करके या उनकी ऑफिशियल वेबसाइट (पोर्टल) पर जाकर अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं.

सरकार इतना सख्त रुख क्यों अपना रही है?

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. इस स्थिति से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर लगातार दबाव बढ़ रहा है. सरकार इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रही है. एक तरफ जहां सब्सिडी की लागत बढ़ रही है वहीं दूसरी तरफ राजकोषीय घाटा भी है.

इससे पहले तेल कंपनियों ने सब्सिडी की लागत को कम करने के लिए पहले ही कई कदम उठाए थे. फिलहाल नए गैस कनेक्शन जारी करने की गति धीमी कर दी गई है. गैस सिलेंडर रिफिल बुक करने के बीच के इंतजार के समय को बढ़ा दिया गया है ताकि खपत को नियंत्रण में रखा जा सके.

विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ‘आपातकालीन’ तैयारी

रिपोर्टों के अनुसार हाल ही में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्त मंत्रालय और RBI के अधिकारियों के बीच कई बैठकें हुई हैं. सरकार न केवल ईधन की कीमतों में बढ़ोतरी पर विचार कर रही है बल्कि डॉलर बचाने के प्रयास में ‘गैर-जरूरी’ सामानों जैसे सोना और इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात पर भी पाबंदियां लगाने की योजना बना रही है.

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