आंदोलनकारी अतिथि अध्यापक मनाएंगे काली दिवाली, 15 नवंबर को मॉक पार्लियामेंट व मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय का घेराव

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रतिया: राजकीय अनुबंधित अध्यापक संघ के आह्वान पर कुरुक्षेत्र लघु सचिवालय के सामने अदालतों के आदेशानुसार 2014 की तीन वर्षीय नियमितीकरण नीति के तहत नियमित करने की मांग को लेकर चल रहा धरना आज 136वें दिन भी जारी रहा। इसी आंदोलन के तहत कंबोज धर्मशाला, ब्लॉक रतिया, जिला फतेहाबाद में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन की आगामी रणनीति घोषित की गई। अतिथि अध्यापक 8 नवंबर को काली दिवाली मनाएंगे तथा 15 नवंबर को कुरुक्षेत्र लघु सचिवालय के सामने मॉक पार्लियामेंट का आयोजन कर मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय तक प्रदर्शन एवं घेराव करेंगे। इस दौरान शिक्षा विभाग द्वारा जारी नकारात्मक स्पीकिंग ऑर्डर की प्रतियां जलाकर सरकार की हठधर्मिता के खिलाफ विरोध दर्ज करवाया जाएगा।

सी एन भारती का संबोधन: काली दिवाली और मॉक पार्लियामेंट की घोषणा  

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए C N भारती ने कहा कि अतिथि अध्यापक पिछले 21 वर्षों से सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य करते हुए शिक्षा व्यवस्था को संभाल रहे हैं, लेकिन सरकार उन्हें नियमित करने की बजाय लगातार अस्थायी व्यवस्था में बनाए रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि 8 नवंबर को प्रदेशभर के अतिथि अध्यापक काली दिवाली मनाकर सरकार के अन्यायपूर्ण रवैये के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करवाएंगे। 15 नवंबर को मॉक पार्लियामेंट के माध्यम से अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण, न्यायिक फैसलों और सरकार की जवाबदेही से जुड़े सवालों को सार्वजनिक मंच पर उठाया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

मॉक पार्लियामेंट में व्यापक भागीदारी का आह्वान 

मॉक पार्लियामेंट में शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, विभिन्न विभागों के कर्मचारी नेताओं, अभिभावक संगठनों, एसएमसी, संयुक्त किसान मोर्चा, विद्यार्थियों एवं युवाओं के संगठनों, हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति, अधिवक्ता यूनियन, लेखक संघ, विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, जन संघर्ष मंच कुरुक्षेत्र तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया जाएगा।

कृष्ण नैन का बयान: नकारात्मक स्पीकिंग ऑर्डर गलत 

सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव कृष्ण नैन ने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा जारी नकारात्मक स्पीकिंग ऑर्डर सरासर गलत, मनमाने और न्यायिक आदेशों की भावना के विपरीत हैं। 16 एवं 18 जून 2014 की तीन वर्षीय नियमितीकरण नीति की सेवा शर्तों में विभाग द्वारा स्पीकिंग ऑर्डर में दर्शाई गई शर्तों का कोई उल्लेख नहीं है। हरियाणा सरकार ने स्वयं 16 एवं 18 जून 2014 को अधिसूचना जारी करके नियमितीकरण की नीति बनाई थी और सरकारी स्कूलों में कार्यरत अतिथि अध्यापक उस नीति की सभी शर्तें पूरी करते हैं।

कॉलेज कैडर में नियमितीकरण और स्कूल कैडर में भेदभाव 

उन्होंने कहा कि कॉलेज कैडर में कार्यरत अतिथि प्रोफेसरों को जून 2014 में नियमित किया जा चुका है, जबकि समान परिस्थितियों में कार्यरत स्कूल कैडर के अतिथि अध्यापकों को नियमितीकरण से वंचित रखा जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2014 की नीति को वैध ठहराने तथा उच्च न्यायालय द्वारा नियमितीकरण पर विचार करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद शिक्षा विभाग ने नकारात्मक स्पीकिंग ऑर्डर जारी कर अतिथि अध्यापकों के दावों को खारिज कर दिया। यह सरकार की कर्मचारी विरोधी नीति और प्रशासनिक हठधर्मिता का उदाहरण है।

न्यायिक फैसलों के बावजूद अधिकारों से वंचित करने का प्रयास

कृष्ण नैन ने कहा कि अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के मदन सिंह मामले के फैसले तथा उच्च न्यायालय के सुखविंदर सिंह मामले में आदेश के बाद नियमितीकरण का रास्ता स्पष्ट हो चुका है। उच्च न्यायालय ने अतिथि अध्यापकों की नियुक्तियों, उनकी मेरिट तथा लगभग दो दशकों की निरंतर सेवा को महत्वपूर्ण माना है। इसके बावजूद सरकार उन्हें नियमित करने की बजाय तकनीकी आधारों पर उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास कर रही है।

ऊमा देवी और जग्गो मामले के सिद्धांतों का हवाला 

उन्होंने कहा कि ऊमा देवी मामले के सिद्धांतों का चयनात्मक इस्तेमाल करके लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को नियमितीकरण से वंचित नहीं किया जा सकता। जग्गो मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने भी लंबे समय तक निरंतर कार्य करने वाले कर्मचारियों के अधिकारों और उनकी सेवा की वास्तविक प्रकृति को महत्व दिया है। अतिथि अध्यापकों से 21 वर्षों तक शिक्षण जैसे नियमित एवं स्थायी प्रकृति के कार्य करवाना और उन्हें केवल अतिथि के नाम पर अधिकारों से वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है।

समान काम के लिए समान अधिकारों से वंचित 

कृष्ण नैन ने कहा कि अतिथि अध्यापक नियमित शिक्षकों के समान पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं, परीक्षाओं एवं परिणामों से संबंधित कार्य करते हैं तथा विद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों में समान जिम्मेदारियां निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित वेतनमान, पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश, स्थानांतरण और पदोन्नति जैसे अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। यह समान काम के लिए समान वेतन, सामाजिक न्याय, कर्मचारी गरिमा तथा संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 की भावना के विपरीत है।

कच्चे रोजगार की व्यापक नीति पर चिंता  

उन्होंने कहा कि सरकार का यह रवैया केवल अतिथि अध्यापकों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थायी रोजगार की जगह कच्चे, संविदा, एचकेआरएन और आउटसोर्सिंग व्यवस्था को बढ़ावा देने की व्यापक नीति का हिस्सा है। सार्वजनिक शिक्षा में स्थायी पदों को समाप्त करके कम वेतन और अधिकारविहीन रोजगार को बढ़ावा देना शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक की गरिमा तथा विद्यार्थियों के भविष्य के लिए भी नुकसानदायक है।

नियमितीकरण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़ा सवाल  

कृष्ण नैन ने कहा कि अतिथि अध्यापकों का नियमितीकरण केवल रोजगार का सवाल नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक न्याय और सरकारी स्कूलों के भविष्य से जुड़ा सवाल है। सरकार को 2014 की तीन वर्षीय नीति के तहत अतिथि अध्यापकों को नियमित करना चाहिए, उनकी वरिष्ठता एवं बकाया वित्तीय लाभों पर विचार करना चाहिए तथा भविष्य में शिक्षकों को लंबे समय तक अतिथि एवं संविदा व्यवस्था में रखने की नीति समाप्त करनी चाहिए।

आंदोलन की कमजोरियों की ईमानदार समीक्षा का आह्वान  

उन्होंने अतिथि अध्यापकों से पिछले दो दशकों के आंदोलन की कमजोरियों, आपसी खींचतान, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं, एकाधिकारवादी नेतृत्व, वित्तीय अनियमितताओं और अलग-अलग चलने की प्रवृत्ति की ईमानदार समीक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं हो सकता। व्यापक एकता, लोकतांत्रिक नेतृत्व, पारदर्शिता, सामूहिक निर्णय और साझा संघर्ष ही नियमितीकरण की लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचा सकते हैं। यदि अतिथि अध्यापक इन कमजोरियों पर विजय प्राप्त कर एकजुट होकर संघर्ष करेंगे तो सरकार को उनकी मांगों को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

महिला विंग की भागीदारी 

राजकीय अनुबंधित अध्यापक संघ की महिला विंग की अध्यक्ष श्रीमती पूनम कुमारी ने बताया कि कुरुक्षेत्र में चल रहे धरने पर प्रत्येक महीने के दूसरे शनिवार को महिला अध्यापिकाओं द्वारा 24 घंटे की बड़ी लगाई जाती है। इसके तहत प्रदेशभर की महिला कर्मचारी कुरुक्षेत्र में एकत्रित होकर सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करती हैं। इसी कड़ी में आगामी 15 नवंबर को महिला अध्यापिकाएं भी कुरुक्षेत्र लघु सचिवालय के सामने धरने पर पहुंचकर अपने अधिकारों की लड़ाई में भागीदारी करेंगी।

विभिन्न संगठनों का समर्थन और चेतावनी  

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के विभिन्न विभागों बिजली बोर्ड, फायर, नगरपालिका, मिड डे मील, भवन निर्माण मजदूर यूनियन तथा छात्र संगठनों के नेताओं ने अतिथि अध्यापकों के 23 जून से कुरुक्षेत्र में चल रहे धरने का समर्थन किया। उन्होंने सरकार से 2014 की तीन वर्षीय नीति के तहत अतिथि अध्यापकों को जल्द नियमित करने की मांग की। कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार समय रहते अतिथि अध्यापकों को नियमित नहीं करती तो विभिन्न विभागों के संगठन मिलकर सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ व्यापक आंदोलन का आह्वान करेंगे।

उपस्थित नेता और आगामी कार्यक्रम  

इस अवसर पर सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के फतेहाबाद जिला सचिव देवीलाल, हरजिंदर कंबोज, सुरजीत सचदेवा, भूदेव, प्रदेश कंबोज, रीना रानी, श्वेता, राजेंद्र बाटू, भूप सिंह, मलकीत सिंह, रघुवीर सिंह, पुष्पा कुमारी, किरण पाल कौर आदि उपस्थित रहे। आंदोलन का आगामी कार्यक्रम 8 नवंबर: प्रदेशभर में अतिथि अध्यापकों द्वारा काली दिवाली मनाकर सरकार की हठधर्मिता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन।

15 नवंबर का राज्य स्तरीय कार्यक्रम और व्यापक आह्वान 

15 नवंबर: कुरुक्षेत्र में धरने के 147वें दिन राज्य स्तरीय प्रदर्शन, लघु सचिवालय के सामने मॉक पार्लियामेंट का आयोजन, नकारात्मक स्पीकिंग ऑर्डर की प्रतियां जलाकर विरोध तथा मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय तक प्रदर्शन एवं घेराव। आह्वान अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण, शिक्षक की गरिमा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की रक्षा के लिए प्रदेश के सभी अतिथि अध्यापक, कर्मचारी, किसान, विद्यार्थी, अभिभावक एवं जनसंगठन 15 नवंबर को कुरुक्षेत्र पहुंचकर संघर्ष को मजबूत करें। सरकार की हठधर्मिता के खिलाफ व्यापक एकता और साझा संघर्ष ही नियमितीकरण की लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचा सकता है।

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