नई दिल्ली: कई बार शरीर में होने वाली छोटी-सी घटना भी लंबे समय बाद बड़ी परेशानी की वजह बन सकती है। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मेडिकल मामला सामने आया है, जहां 72 साल के एक बुजुर्ग को महीनों से खांसी और बार-बार फेफड़ों में संक्रमण हो रहा था। डॉक्टरों को जांच के दौरान उनकी सांस की नली में ट्यूमर होने का शक हुआ। लेकिन जब दूरबीन की मदद से अंदर जांच की गई, तो सच्चाई जानकर डॉक्टर भी हैरान रह गए। जिस गांठ को ट्यूमर समझा जा रहा था, उसके अंदर बुजुर्ग का अपना टूटा हुआ दांत फंसा मिला।
कई महीनों से खांसी और संक्रमण से थे परेशान
72 वर्षीय बुजुर्ग को लंबे समय से कफ वाली खांसी आ रही थी। इसके साथ ही उन्हें बार-बार सांस से जुड़ा संक्रमण भी हो रहा था। कई बार एंटीबायोटिक दवाएं देने के बावजूद उनकी परेशानी पूरी तरह ठीक नहीं हो रही थी। बुजुर्ग को पहले से दिल से जुड़ी बीमारी भी थी। लगातार खांसी और संक्रमण के कारण डॉक्टरों ने उनकी विस्तृत जांच कराने का फैसला किया।
CT स्कैन में दिखा फेफड़े की नली में ब्लॉकेज
डॉक्टरों ने जब बुजुर्ग का CT स्कैन किया, तो दाएं फेफड़े के निचले हिस्से की एक छोटी सांस की नली में रुकावट दिखाई दी। इसके आसपास सूजन और संक्रमण के संकेत भी मिले। इसके बाद डॉक्टरों को आशंका हुई कि सांस की नली में कोई ट्यूमर विकसित हो गया है। आगे की जांच के लिए ब्रोंकोस्कोपी करने का फैसला लिया गया।
ब्रोंकोस्कोपी में दिखी लाल रंग की गांठ
ब्रोंकोस्कोपी एक मेडिकल प्रक्रिया है, जिसमें कैमरे लगी पतली और लचीली ट्यूब की मदद से फेफड़ों और सांस की नलियों के अंदर देखा जाता है। जांच के दौरान डॉक्टरों को सांस की नली में लाल रंग की एक उभरी हुई गांठ दिखाई दी। इसमें खून की नसें भी नजर आ रही थीं और इसने सांस की नली का रास्ता लगभग पूरी तरह बंद कर रखा था। इसकी बनावट देखकर डॉक्टरों को कार्सिनॉयड ट्यूमर होने का शक हुआ।
ट्यूमर के नीचे मिला इंसान का दांत
डॉक्टरों ने गांठ को हटाने के लिए विशेष उपकरणों की मदद ली। जब सूजे हुए ऊतकों को हटाया गया, तो उसके नीचे एक सख्त और सफेद रंग की चीज दिखाई दी। शुरुआत में इसे निकालना आसान नहीं था। इसके बाद डॉक्टरों ने फोर्सेप्स और रिट्रीवल बास्केट की मदद से उस चीज को बाहर निकाला। जांच करने पर पता चला कि वह कोई ट्यूमर नहीं, बल्कि इंसान का एक दांत था।
तीन साल पहले बेहोशी के दौरान टूटा था दांत
दांत मिलने के बाद डॉक्टरों ने बुजुर्ग से उनके पुराने मेडिकल और डेंटल इतिहास के बारे में दोबारा पूछा। तब उन्हें याद आया कि करीब तीन साल पहले वह बेहोश हो गए थे। इसी दौरान उनका एक दांत टूटकर निकल गया था। डॉक्टरों का मानना है कि उसी घटना के दौरान दांत सांस के रास्ते फेफड़े की नली में पहुंच गया होगा। बुजुर्ग को उस समय इसका पता नहीं चला और दांत कई साल तक वहीं फंसा रहा।
दांत निकलने के बाद ठीक हुई तबीयत
सांस की नली में लंबे समय तक दांत फंसे रहने से वहां सूजन और संक्रमण हो गया था। इसी वजह से बुजुर्ग को लगातार खांसी और सांस से जुड़ी परेशानियां हो रही थीं। दांत निकालने के बाद की गई जांच में कैंसर के कोई संकेत नहीं मिले। इसके बजाय वहां सूजे हुए ऊतक और संक्रमण की पुष्टि हुई। इलाज के बाद बुजुर्ग की हालत में सुधार हुआ और फेफड़े की बंद सांस की नली फिर से खुल गई।












