नई दिल्ली: इस साल दीवाली का त्योहार 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन हर घर में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की एक साथ पूजा होती है। पूजा में खील बताशे का भोग लगाया जाता है और खास बात ये है कि माता लक्ष्मी के सामने घी का दीपक और गणपती जी के सामने सरसों का तेल का दीपक जलाया जाता है।
खील और बताशे का महत्व
आमतौर पर पूजा में चावल का इस्तेमाल होता है, लेकिन दिवाली एक ऐसा त्योहार है जिसमें चावल की जगह खील का इस्तेमाल होता है। खील यानी खिली हुई धान, जो घर में सुख-समृद्धि और अनाज भरा रहने का प्रतीक है। वहीं बताशे परिवार में मिठास बनाए रखने के लिए चढ़ाए जाते हैं, ताकि घर में हमेशा प्यार बना रहे।
सरसों के तेल के दीपक से काजल बनाने की परंपरा
दिवाली की पूजा में एक खास परंपरा है। माता लक्ष्मी के बाएं तरफ बैठे गणपति जी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है। पूजा के बाद इसी दीपक की लौ से एक कच्चे मिट्टी के दीये पर काजल बनाया जाता है। अगले दिन सुबह घर के सभी लोग, खासकर बच्चे, इस काजल को आंखों में लगाते हैं। मान्यता है कि इस काजल को लगाने से बुरी नजर से बचाव होता है और घर पर गणेश जी की कृपा बनी रहती है। ये काजल शुभ माना जाता है।
गणेश और लक्ष्मी के दीपक का प्रतीकात्मक महत्व
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता यानी बाधाओं को दूर करने वाला कहा जाता है। माता लक्ष्मी धन देती हैं और गणेश जी उस धन को सही तरीके से इस्तेमाल करने की बुद्धि देते हैं। इसलिए उनके सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना इस बात का प्रतीक है कि जीवन की सारी रुकावटें दूर हों और परिवार में सुख-शांति बनी रहे।












