नई दिल्ली: अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन चुनावी निगरानी को लेकर विवादों में घिर गया है। मंगलवार को हुए मतदान के दौरान न्याय विभाग ने देश के सभी 50 राज्यों में करीब 1,000 चुनाव मॉनिटर और ऑब्जर्वर तैनात किए। विभाग ने इसे अपने इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा निगरानी अभियान बताया है। हालांकि, इस फैसले पर डेमोक्रेटिक नेताओं और मतदाता अधिकार संगठनों ने सवाल उठाए हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मॉनिटर उन इलाकों में भेजे गए जहां 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस ने ट्रंप को हराया था। ऐसे करीब दो-तिहाई क्षेत्रों में अश्वेत और लातीनी मतदाताओं की आबादी अधिक है। इनमें कई ऐसे राज्य भी शामिल हैं, जो सीनेट में बहुमत तय करने के लिहाज से अहम माने जाते हैं।
सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि न्याय विभाग निष्पक्ष तरीके से चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है। विभाग के अनुसार, ऑब्जर्वर संघीय मतदान कानूनों के पालन पर नजर रखेंगे। हालांकि, उन्हें मतदान केंद्रों पर तलाशी लेने या किसी मतदाता को वोट डालने से रोकने का अधिकार नहीं होगा।
डेमोक्रेटिक नेताओं ने जताई नाराजगी
मतदाता अधिकार संगठनों और डेमोक्रेटिक नेताओं ने इस तैनाती को मतदाताओं में डर पैदा करने वाला कदम बताया है। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा कि उनका राज्य भी अपने ऑब्जर्वर तैनात करेगा, जो संघीय मॉनिटरों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। लॉस एंजिल्स की मेयर कैरेन बास ने आरोप लगाया कि प्रशासन मतदाताओं को डराने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, ट्रंप प्रशासन चुनावी नतीजे अपने पक्ष में नहीं आने की स्थिति में उन्हें चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।
कैलिफोर्निया में बैलेट को लेकर विवाद
यह निगरानी ऐसे समय हुई है, जब कैलिफोर्निया में 20 हजार से अधिक मेल-इन बैलेट को लेकर संघीय प्रशासन और राज्य सरकार के बीच कानूनी विवाद चल रहा है। ट्रंप प्रशासन ने आरोप लगाया था कि ये बैलेट गैर-नागरिकों को जारी किए गए। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन की याचिका खारिज कर दी थी, हालांकि बाद में कुछ फैसलों में बदलाव भी हुए।
ट्रंप की लोकप्रियता पर भी सवाल
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ज्यादातर मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति की पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है। इस बार ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग भी निचले स्तर पर है। ईरान के साथ युद्ध, महंगा ईंधन और बढ़ती महंगाई मतदाताओं की नाराजगी की बड़ी वजह हैं।
SSRS के एग्जिट पोल के मुताबिक, करीब आधे मतदाताओं ने चुनाव को ट्रंप के खिलाफ नाराजगी जताने का मौका माना। लगभग तीन-चौथाई लोग देश की दिशा से असंतुष्ट थे, जबकि 70 फीसदी का मानना था कि कांग्रेस को राष्ट्रपति की शक्तियों पर ज्यादा नियंत्रण रखना चाहिए।












