‘स्त्री 2’ की जबरदस्त कामयाबी के बाद श्रद्धा कपूर एक बार फिर दर्शकों के सामने बिल्कुल अलग भूमिका में दिखाई देने वाली हैं। इस बार उनके किरदार का आधार न तो डर और हास्य का मेल है और न ही किसी पारंपरिक रोमांटिक कहानी का ढांचा। मैडॉक फिल्म्स की नई पेशकश ‘ईठा’ में वह महाराष्ट्र की लोकपरंपरा से जुड़ी ऐसी नृत्यांगना का रूप धारण कर रही हैं, जिसके जीवन में कला, संघर्ष, आत्मसम्मान और सामाजिक तिरस्कार के कई रंग शामिल हैं। फिल्म का ट्रेलर सामने आने के बाद श्रद्धा के रूपांतरण, उनके संवाद और लावणी नृत्य की झलक को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
निर्देशक लक्ष्मण उतेकर ने इस कहानी के जरिए उस दुनिया को पर्दे पर लाने की कोशिश की है, जिसे अक्सर समाज ने गलत नजर से देखा। फिल्म में विठाबाई नारायणगांवकर के जीवन से प्रेरित प्रसंगों के जरिए कलाकारों की असली पहचान और उनके संघर्ष को सामने रखने का प्रयास किया गया है।
नौवारी परिधान में श्रद्धा ने दिखाई मराठी संस्कृति की झलक
ट्रेलर में श्रद्धा कपूर का पहनावा और अंदाज खास आकर्षण पैदा करता है। पारंपरिक नौवारी साड़ी, नथ और बालों में सजे गजरे के साथ उनका रूप महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है। उनके हावभाव और बोलने का तरीका भी इस किरदार के लिए की गई तैयारी की झलक देते हैं। एक संवाद में किरदार कहता है कि अगर वह चुपचाप मर गई तो लोग उसे बेचारी समझेंगे, लेकिन मंच पर नाचते हुए जान गई तो उसकी कहानी दूसरों के लिए उदाहरण बन जाएगी। यह पंक्ति उसके आत्मविश्वास और कला के प्रति समर्पण को उजागर करती है। नौवारी साड़ी को लेकर उठे सवाल पर उनका जवाब भी इस पारंपरिक पोशाक के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करता है।
तमाशा कलाकारों के प्रति समाज की सोच पर सवाल
फिल्म का एक महत्वपूर्ण पक्ष उन महिलाओं की जिंदगी है, जो तमाशा मंडलियों और लावणी के मंचों से जुड़ी रही हैं। लंबे समय तक ऐसे कलाकारों को लेकर समाज में कई तरह की धारणाएं और पूर्वाग्रह मौजूद रहे हैं। उनके पेशे को सम्मान देने के बजाय कई बार उन्हें परिवार और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। ‘ईठा’ इसी मानसिकता को चुनौती देने की कोशिश करती दिखाई देती है। ट्रेलर में संकेत मिलता है कि इन महिलाओं की जिंदगी केवल मंच पर प्रस्तुति देने तक सीमित नहीं थी। उनके सामने आर्थिक कठिनाइयां, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सम्मान हासिल करने की जद्दोजहद भी थी। फिल्म इन पहलुओं को कहानी का हिस्सा बनाती है।
विठाबाई नारायणगांवकर के जीवन से मिली कहानी को प्रेरणा
‘ईठा’ की कहानी का संबंध महाराष्ट्र की चर्चित लावणी कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर के जीवन से बताया गया है। उनका सफर लोककला के क्षेत्र में संघर्ष और पहचान की मिसाल माना जाता है। फिल्म के माध्यम से उस दौर और माहौल को समझने का अवसर मिलेगा, जिसमें महिला कलाकारों को अपनी प्रतिभा साबित करने के साथ सामाजिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता था। श्रद्धा का किरदार इसी पृष्ठभूमि में आगे बढ़ता नजर आता है।
संगीत और नृत्य भी होंगे फिल्म की बड़ी ताकत
फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी अजय-अतुल ने संभाली है, जबकि नृत्य निर्देशन वैभवी मर्चेंट ने किया है। लावणी जैसी पारंपरिक नृत्य शैली को बड़े पर्दे पर प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना फिल्म के लिए अहम माना जा रहा है। ट्रेलर में इसकी झलक देखने को मिलती है। संगीत और नृत्य का मेल कहानी के भावनात्मक पक्ष को मजबूत कर सकता है।
दिसंबर में सिनेमाघरों में रिलीज होगी ‘ईठा’
मैडॉक फिल्म्स की यह फिल्म 4 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। ट्रेलर ने फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर रहेगी कि श्रद्धा कपूर पर्दे पर विठाबाई से प्रेरित किरदार को किस तरह जीवंत करती हैं और क्या ‘ईठा’ लावणी तथा तमाशा कलाकारों के प्रति बनी पुरानी धारणाओं को बदलने में सफल हो पाती है।












