शोभायात्राओं, धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से भक्तिमय हुआ माहौल, महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को आत्मसात करने का संदेश

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गाजियाबाद: कहीं रामायण की चौपाइयों का पाठ, कहीं धार्मिक झांकियों की छटा तो कहीं महर्षि वाल्मीकि के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं की भागीदारी। महर्षि वाल्मीकि जयंती पर गाजियाबाद में आस्था और संस्कृति का संगम देखने को मिला। जिले के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों में महर्षि वाल्मीकि के व्यक्तित्व, उनकी रचनाओं और सामाजिक संदेश को याद किया गया। जिला प्रशासन और नगर निकायों के सहयोग से हुए आयोजनों में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

रामायण पाठ, रैलियों और झांकियों से गूंजा शहर; आदिकवि के मानवीय मूल्यों को अपनाने का दिया संदेश

जयंती के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर श्रीरामचरितमानस और रामायण पाठ का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर महर्षि वाल्मीकि को नमन किया। कई स्थानों पर रैलियां, शोभायात्राएं और झांकियां निकाली गईं, जबकि सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भारतीय परंपराओं और धार्मिक विरासत को प्रदर्शित किया गया। महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि और रामायण के रचयिता के रूप में जाना जाता है। उनकी रचना केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि मर्यादा, कर्तव्य, नैतिकता और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा भी है। जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों में इन आदर्शों को जीवन में अपनाने और समाज में आपसी सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया गया। जिले के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में हुए आयोजनों के जरिए धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने पर जोर रहा। जिला प्रशासन और नगर निकायों के सहयोग से कार्यक्रम संपन्न हुए। महर्षि वाल्मीकि जयंती के आयोजनों ने लोगों को उनकी साहित्यिक विरासत और विचारों से जुड़ने का अवसर दिया।

Reported By: Mohit Gautam

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