सुबह 9 बजे कोर्ट नहीं आ सकता, जिम जाना है, Gen-Z इंटर्न की बात पर भड़की महिला वकील, पोस्ट ने मचाई बहस

0
10
Gen-Z interns not come to count at 9 AM
Gen-Z interns not come to count at 9 AM

नई दिल्ली: सोशल मीडिया इन दिनों एक ऐसा पोस्ट वायरल हो रहा है, जहां दिल्ली के महिला वकील ने जेनजी इंटर्न के साथ काम करने को लेकर अपना एक्सपीरिएंस शेयर किया है. वकील ने बताया कि उन्होंने अपने इंटर्न से सुबह 9 बजे कोर्ट पहुंचने को कहा था, लेकिन इंटर्न ने अपनी जिम की टाइमिंग का हवाला देते हुए कहा कि वह ऑफिस नहीं पहुंच पाएगा. हालांकि, बाद में वह एक बार ऑफिस आने के लिए मान गया. 

महिला वकील ने इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि इस मामले में उनकी भूमिका सीनियर की है या फिर पर्सनल असिस्टेंट की. उनका कहना था कि जब किसी सामान्य काम की जिम्मेदारी को भी ‘सिर्फ एक बार’ करने वाली बात माना जाए, तो इससे काम को लेकर व्यक्ति की सोच का पता चलता है.

बता दें, जैसे ही ये पोस्ट सोशल मीडिया पर सामने आया लोग इस पर जमकर प्रतिक्रिया दे रहे है और दो हिस्सों में बट गए है. एक तरफ जहां कुछ यूजर्स ने इंटर्न के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि प्रोफेशनल रिस्पांसिबिलिटी को निजी दिनचर्या से ऊपर रखना चाहिए. वहीं, दूसरे पक्ष का कहना था कि युवा कर्मचारियों और इंटर्न्स को अपने निजी समय और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के लिए सीमाएं तय करने का अधिकार है. कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि अगर किसी कर्मचारी से सामान्य समय से पहले काम करने की अपेक्षा की जाती है, तो यह उसके निर्धारित काम के घंटे और भुगतान की शर्तों पर निर्भर होना चाहिए.

‘क्या यह पोस्ट लोगों को भड़काने के लिए थी?’

लॉयर पांखी हरमिलापी ने पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि क्या यह टिप्पणी लोगों को नाराज करने के इरादे से की गई थी. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या इंटर्न को जल्दी पहुंचने के लिए अतिरिक्त भुगतान दिया जा रहा है. इसके साथ ही उन्होंने ‘जूनियर या पर्सनल असिस्टेंट’ वाली टिप्पणी को भी गलत बताया. 

वहीं इसके जवाब में महिला वकील ने स्पष्ट किया कि सुबह 9 बजे पहुंचना कोई अतिरिक्त या असामान्य समय नहीं था, बल्कि कोर्ट और ब्रीफिंग से जुड़ी जरूरत थी. उन्होंने बताया कि उनके इंटर्न को भुगतान के साथ काम से जुड़े खर्चों का रिइम्बर्समेंट भी मिलता है. वकील ने आगे कहा कि विवाद की असली वजह जिम नहीं है, असल दिक्कत यह थी कि जो काम आम तौर पर जिम्मेदारी का हिस्सा होना चाहिए, उसे भी एक बार के लिए किया जाने वाला काम बताया गया.

महिला ने दिया जवाब 

उन्होंने यह भी बताया कि उनके वर्कप्लेस पर शनिवार को वर्क फ्रॉम होम, जरूरत पड़ने पर जल्दी जाने और अन्य सुविधाओं जैसी कई तरह की छूट दी जाती है. वहीं बाद में उन्होंने कहा कि उनकी पोस्ट को लोगों ने जरूरत से ज्यादा गंभीरता से ले लिया है. आगे महिले से इस पोस्ट को बस एक अनुभव बताया और कहा कि इंटर्न ने जिम भी कर लिया और आराम भी, जबकि उन्होंने उसका काम पहले ही पूरा कर दिया था.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here