वृंदावन: शरद पूर्णिमा पर ठा. बांकेबिहारी मंदिर में भक्ति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। धवल चांदनी के बीच ठाकुरजी मोर मुकुट, कटि-काछिनी और हीरे-मोती के आभूषण धारण कर मुरलीधर स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। साल में केवल एक बार होने वाली इस विशेष झांकी के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालुओं का वृंदावन पहुंचना शुरू हो गया है। मंदिर में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए प्रबंधन और प्रशासन ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
ठाकुरजी के विशेष श्वेत शृंगार की तैयारियां
शरद पूर्णिमा पर बांकेबिहारीजी के विशेष शृंगार की तैयारियां कई दिन पहले से की जाती हैं। इस दिन ठाकुरजी को सफेद रंग की जरीदार पोशाक धारण कराई जाएगी। पोशाक को कोलकाता के कारीगरों ने विशेष रूप से तैयार किया है। राजभोग सेवायत गुंजन गोस्वामी के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर ठाकुरजी का स्वरूप अलौकिक होता है। मुरली धारण किए ठाकुरजी की मनोहारी छवि के दर्शन के लिए श्रद्धालु सालभर इंतजार करते हैं। मंदिर में राजभोग और शयनभोग सेवा के दौरान होने वाले इस विशेष शृंगार के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रहेंगे।
दर्शन समय बढ़ाने का निर्णय, भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था
श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर प्रबंधन ने दर्शन का समय बढ़ाने का निर्णय लिया है। मंदिर प्रबंधक मुनीश कुमार शर्मा ने बताया कि न्यायालय के आदेशों के क्रम में राजभोग और शयनभोग, दोनों सेवाओं में निर्धारित समय से एक-एक घंटे अधिक दर्शन कराए जाएंगे। इसके तहत दोपहर एक बजे मंदिर के पट बंद होंगे, जबकि रात में शयन आरती के बाद साढ़े दस बजे पट बंद किए जाएंगे। प्रशासन के सहयोग से श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुचारु दर्शन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
वृंदावन के अन्य मंदिरों में भी विशेष शृंगार और भोग
शरद पूर्णिमा पर केवल बांकेबिहारी मंदिर ही नहीं, बल्कि वृंदावन के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी विशेष आयोजन होंगे। राधासनेह बिहारी मंदिर सहित सप्तदेवालयों में शामिल ठा. राधादामोदर, राधारमण, राधाश्यामसुंदर, गोविंददेव, गोपीनाथ और मदनमोहन मंदिर में भी ठाकुरजी श्वेत वस्त्र धारण कर मुरली बजाते हुए दर्शन देंगे। इस अवसर पर ठाकुरजी को चंद्रकला और खीर का भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। शरद पूर्णिमा की रात ठाकुरजी के दिव्य स्वरूप के दर्शन और प्रसाद पाने के लिए भक्तों में विशेष उत्साह रहता है।












