आतंकवाद पर भारत-अमेरिका एक साथ, पाकिस्तान से रिश्तों पर क्या बोले अमेरिकी विदेश मंत्री?

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नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इन दिनों भारत दौरे पर हैं। गुरुवार को उन्होंने आतंकवाद और पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका के पाकिस्तान के साथ करीबी रिश्ते भारत के साथ उसकी साझेदारी की कीमत पर नहीं होंगे। आतंकवाद को लेकर दोनों देशों की चिंताएं एक जैसी हैं।

अमेरिका खुद आतंकवाद का शिकार: रुबियो 

एक न्यूज चैनल से बातचीत में रुबियो ने कहा, पाकिस्तान के साथ हमारा रिश्ता किसी भी तरह भारत के साथ हमारे संबंधों की कीमत पर नहीं है। वॉशिंगटन और नई दिल्ली आतंकवाद को लेकर समान चिंताएं साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के वैश्विक हितों के लिए जरूरी है कि वह दुनिया के सभी देशों से रिश्ते बनाए रखे, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है। अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से रहे हैं। बदलते समीकरणों से वॉशिंगटन को अलग-अलग मुद्दों पर इस्लामाबाद के फैसलों को प्रभावित करने में मदद मिलेगी।

आतंकवाद पर बात करते हुए रुबियो ने कहा कि अमेरिका खुद आतंकवाद का शिकार रहा है और दुनिया में कोई भी देश आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका से ज्यादा नहीं लड़ता। उन्होंने कहा, हमने इस्लामिक स्टेट के कब्जे वाले इलाकों को खत्म किया, अलकायदा को कमजोर किया और ओसामा बिन लादेन को मारा।

चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन पर टिप्पणी से इनकार

इससे पहले बुधवार को रुबियो ने भारत में चुनाव आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शनों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने इसे भारत का घरेलू राजनीतिक मामला बताया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की ओर से प्रदर्शनों की आलोचना को भी खारिज कर दिया। रुबियो ने कहा, यह एक घरेलू राजनीतिक मामला है। मैं उनकी राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करूंगा। भारत एक लोकतांत्रिक देश है, यहां चुनाव होते हैं, इसलिए मैं उनके आंतरिक मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिका में भी हर दिन विरोध प्रदर्शन होते हैं, जो राजनीतिक विमर्श और वैचारिक मतभेदों को दर्शाते हैं। उन्होंने यूरोप में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि वह तोड़फोड़, इमारतों में जबरन घुसने और आगजनी जैसे दंगों की बात नहीं कर रहे हैं। रुबियो के इस दौरे को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। उनके बयान से साफ है कि अमेरिका भारत को अपना प्रमुख साझेदार मानता है और पाकिस्तान के साथ संबंधों को भारत के नजरिए से नहीं देखता।

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