रतिया (हरियाणा) : 21 अक्टूबर भारत विकास परिषद शाखा रतिया की ओर से अग्रवाल धर्मशाला में स्वर्गीय कांता देवी मंगला, धर्मपत्नी स्वर्गीय किशन लाल मंगला की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। स्व. कांता देवी मंगला का निधन 14 अक्टूबर 2026 को हुआ था। उनके निधन के बाद परिजनों ने दुख की इस घड़ी में भी मानवता और परोपकार की मिसाल पेश करते हुए उनके नेत्रदान के लिए सहमति दी। उनके दोनों कॉर्निया दो जरूरतमंद व्यक्तियों को प्रत्यारोपित किए जा चुके हैं, जिससे उनके जीवन में नई रोशनी आने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
परिजनों ने दुख की घड़ी में लिया प्रेरणादायी निर्णय
स्व. कांता देवी मंगला के निधन का समाचार मिलने पर भारत विकास परिषद शाखा रतिया के गतिविधि संयोजक (सेवा) जनक राज गोयल ने परिवार से संपर्क कर नेत्रदान जैसे पुनीत कार्य के लिए पहल की। इस कार्य में शहर के प्रमुख समाजसेवी एवं गोगा मेड़ी रतिया के प्रधान रामगोपाल पाल तथा राम आश्रम रतिया के प्रधान विनोद बंसल का भी सहयोग लिया गया। स्व. कांता देवी के पुत्र अश्वनी मंगला एवं रामलाल लाला ने मानवीय संवेदनाओं से जुड़े इस कार्य के लिए सहर्ष सहमति प्रदान की।
इसके बाद भारत विकास परिषद शाखा रतिया के अध्यक्ष राज कुमार सिंगला ने लायंस आई बैंक, सिरसा की टीम से संपर्क किया। टीम रतिया पहुंची और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद नेत्रदान का कार्य संपन्न करवाया। इस प्रकार स्व. कांता देवी मंगला के परिजनों ने अपने इस निर्णय से यह संदेश दिया कि किसी अपने को खोने का दुख कितना भी बड़ा क्यों न हो, मानवता की सेवा का संकल्प दूसरों के जीवन में उम्मीद जगा सकता है।
एक नेक फैसले से दो परिवारों को मिली नई उम्मीद
नेत्रदान को महादान कहा जाता है, क्योंकि इसके माध्यम से किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी लौटाने का अवसर मिलता है। स्व. कांता देवी मंगला के दोनों कॉर्निया जरूरतमंद व्यक्तियों को प्रत्यारोपित किए जा चुके हैं। उनका यह योगदान उनके जाने के बाद भी मानवता की सेवा के रूप में याद किया जाएगा।
परिषद के सदस्यों ने कहा कि नेत्रदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। यदि प्रत्येक परिवार इस विषय पर जागरूक हो और निधन के बाद नेत्रदान के लिए सहमति देने के महत्व को समझे, तो अनेक जरूरतमंद लोगों को लाभ पहुंचाने में मदद मिल सकती है। स्व. कांता देवी के परिवार का यह कदम अन्य परिवारों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।
नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान
भारत विकास परिषद शाखा रतिया के गतिविधि संयोजक (संपर्क) एडवोकेट नरेंद्र कुमार मलिक ने कहा कि परिषद समाज में सेवा, संस्कार और सहयोग की भावना को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। रक्तदान, नेत्रदान और अन्य सामाजिक सेवा कार्यों के प्रति लोगों को जागरूक करना परिषद के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे अपने परिवारों में नेत्रदान के विषय पर चर्चा करें और इस महादान के महत्व को समझते हुए जागरूकता फैलाने में योगदान दें।
उन्होंने कहा कि स्व. कांता देवी मंगला के परिजनों ने दुख की घड़ी में नेत्रदान के लिए सहमति देकर अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी आने से न केवल उसे, बल्कि उसके पूरे परिवार को नई उम्मीद मिलती है। नेत्रदान के माध्यम से व्यक्ति अपने निधन के बाद भी मानवता की सेवा में योगदान दे सकता है।
परिषद के सदस्यों ने रतिया शहर की सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं, उनके सदस्यों तथा आसपास के गांवों के निवासियों से अपील की कि वे नेत्रदान के प्रति जागरूक बनें। किसी व्यक्ति के निधन के बाद नेत्रदान करवाने के इच्छुक परिजन भारत विकास परिषद शाखा रतिया के सदस्यों से संपर्क कर सकते हैं। परिषद की ओर से ऐसे पुनीत कार्यों में यथासंभव सहयोग दिया जाएगा।
श्रद्धांजलि सभा में गणमान्य सदस्य रहे मौजूद
श्रद्धांजलि सभा में भारत विकास परिषद के गतिविधि संयोजक (पर्यावरण) नितेश अग्रवाल, वरिष्ठ सदस्य प्रदीप बंसल, सेवा टोली से डॉ. दीपक गोयल, विनोद गर्ग निक्कू सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने स्व. कांता देवी मंगला को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके परिवार द्वारा लिए गए इस मानवीय निर्णय की सराहना की।
परिषद का प्रेरणादायी संदेश
“जीते जी रक्तदान, मरणोपरांत नेत्रदान मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।”
स्व. कांता देवी मंगला का नेत्रदान समाज को यह संदेश देता है कि सेवा और परोपकार की भावना से लिया गया एक निर्णय किसी जरूरतमंद के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है। उनका यह योगदान मानवता की सेवा के रूप में सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
Reported By: Rimpi Jindal











