आज से भारत दौरे पर अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो, 26/11 पीड़ितों को देंगे श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के रिश्तों में हल्के तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार से तीन दिन के भारत दौरे पर आ रहे हैं। इस यात्रा में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा और अहम तकनीकों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बात होगी। साथ ही पश्चिम एशिया संकट भी चर्चा के एजेंडे में रहेगा। इस दौरे को दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

रुबियो की इस साल यह दूसरी भारत यात्रा है। इससे पहले मई में वे भारत आए थे, तब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत की थी। इस बार का दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दोनों देशों के संबंधों में कुछ खिंचाव बना हुआ है। इसलिए इस यात्रा से रिश्तों में गर्माहट लौटने की उम्मीद भी जताई जा रही है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, रुबियो मंगलवार दोपहर 2:15 बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे। वे अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।

जयशंकर से बैठक और 26/11 को श्रद्धांजलि

मंगलवार को रुबियो की डॉ. एस. जयशंकर के साथ बैठक होगी। इसमें भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा होगी। द्विपक्षीय व्यापार समझौते और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी बातचीत की संभावना है। इस यात्रा की एक खास बात यह है कि रुबियो ताज मेमोरियल पर 26/11 मुंबई आतंकी हमले के पीड़ितों को पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। उस हमले में 160 से ज्यादा लोगों की जान गई थी, जिनमें छह अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे। यह कदम दोनों देशों के साझा दुख और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का प्रतीक माना जा रहा है।

जामनगर जाएंगे, व्यापार समझौता नजदीक

बुधवार को रुबियो गुजरात के जामनगर जाएंगे। भारत आने से पहले उज्बेकिस्तान में उन्होंने कहा था कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब है। रुबियो ने रूसी तेल खरीद पर भारत को अमेरिकी टैरिफ में दी गई छूट की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अभी भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा है और वे इसके बहुत करीब हैं। इसलिए जब राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी छूट या ऐसे अन्य मामलों पर फैसला लेते हैं, तो इन बातों को भी ध्यान में रखा जाता है। यानी व्यापार वार्ता का असर दूसरे फैसलों पर भी दिख रहा है।

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