नई दिल्ली: फ्रांस में बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खराब हालत के खिलाफ निकले विरोध मार्च ने हिंसक रूप ले लिया। पेरिस पुलिस ने रविवार को बताया कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी और लूटपाट के मामले में 855 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। शनिवार को हुए इस मार्च में हजारों लोग सड़कों पर उतरे थे।
1 लाख से ज्यादा लोग हुए शामिल
पुलिस के मुताबिक शनिवार को पेरिस में निकाले गए मार्च में करीब 1.10 लाख लोगों ने हिस्सा लिया था। इस दौरान कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। वहीं पूरे फ्रांस की बात करें तो अधिकारियों का कहना है कि देशभर में करीब 5.50 लाख लोग प्रदर्शन में शामिल हुए, जबकि आयोजकों का दावा है कि यह संख्या 8 लाख के करीब थी।
अधिकारियों ने बताया कि नकाब पहने कुछ प्रदर्शनकारियों ने सिटी हॉल और सरकारी दफ्तरों जैसी सार्वजनिक इमारतों को निशाना बनाया। कई दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई।
एक व्यक्ति की मौत, कई पुलिसकर्मी घायल
पेरिस पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति की हार्ट अटैक से मौत हो गई। फ्रांसीसी मीडिया के अनुसार सड़क पर मार्च के दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी थी। इसके अलावा पुलिस और अर्द्धसैनिक बल के 13 जवान और दो दमकलकर्मी भी घायल हुए हैं। रविवार सुबह पेरिस के प्लेस डे ला रिपब्लिक इलाके में हिंसा के निशान साफ दिखे। सड़कों पर उखड़े हुए पत्थर, टूटी हुई दुकानें और बिखरे हुए कांच के टुकड़े पड़े थे। शहर के कई टूरिस्ट और शॉपिंग इलाकों में भी लूटपाट की खबरें आई हैं।
दोपहर बाद भड़की हिंसा
पुलिस का कहना है कि शनिवार को मध्य पेरिस में कई सौ से लेकर एक हजार से ज्यादा लोगों के समूहों ने बिना इजाजत मार्च निकाला। पुलिस ने कहा, “दोपहर के समय हिंसा शुरू हुई, जब बड़ी संख्या में ऐसे लोग आ गए जिनका मकसद सिर्फ अशांति का फायदा उठाकर चोरी और लूटपाट करना था।”
प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू और गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने इस हिंसा के लिए कट्टर वामपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि बाद में लूटपाट के इरादे से दूसरे असामाजिक तत्व भी भीड़ में शामिल हो गए। फिलहाल पेरिस में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है।












