नई दिल्ली: मेरठ का सनसनीखेज सौरभ राजपूत हत्याकांड, जिसे नीला ड्रम केस के नाम से जाना गया, इसी लेकर अब बड़ा अपडेट सामने आया है. बता दें, इस मामले में आखिरकार अदालत ने अपने फैसला सुना दिया है. 14 अक्टूबर 2026 यानी मंगलवार को कोर्ट ने दोषी मुस्कान रस्तोगी और उसके बॉयफ्रेंड साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुना दी है।
अदालत ने 30 सितंबर को ही दोनों को हत्या का दोषी करार दिया था। वहीं सजा के ऐलान के दौरान दोनों आरोपी जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए, जिस दौरान कोर्ट में मृतक सौरभ की मां रेणु देवी और भाई बबलू भी मौजूद रहे।
फैसला सुनाते हुए जज ने क्या कहा?
हत्याकांड पर अपना फैसला सुनाते हुए जज ने महाभारत का प्रसंग देते हुए कहा कि न्यायालय अपना काम करेगा। सौरभ के परिवार के वकील ने बताया कि बचाव पक्ष ने सजा कम कराने की पूरी कोशिश की, लेकिन अंत में पीड़ित परिवार को न्याय मिला। वहीं कोर्ट के फैसले के बाद सौरभ के घर वाले भावुक दिखे और कुछ बोल नहीं सके।
माता-पिता नहीं भी दिया बेटी के विरुद्ध बयान
इतना ही नहीं मुस्कान के माता-पिता ने कोर्ट में लिखित बयान देकर कहा कि मृतक सौरभ बहुत अच्छा लड़का था और उसकी बेरहमी से हत्या की गई। उन्होंने कहा कि अगर मुस्कान को फांसी की सजा मिलती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और अब उनका उससे कोई संबंध नहीं है। ख़बरों के मुताबिक, मुस्कान के परिवार वाले एक बार भी उससे मिलने जेल नहीं गए थे।
क्या था पूरा मामला?
दरसअल, 3 मार्च 2025 को मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या कर दी थी। हत्या के बाद दोनों ने शव के टुकड़े कर उसे एक नीले ड्रम में भरकर सीमेंट से सील कर दिया था, ताकि सबूत मिटाया जा सके। इस मामले में करीब 126 सुनवाई हुईं। सभी सबूतों और गवाहों की जांच के बाद अदालत ने माना कि दोनों ने सुनियोजित तरीके से सौरभ की हत्या की और फिर सबूत मिटाने की कोशिश की।
दोषी करार देते हुए कोर्ट ने कहा था कि ऐसा अपराध समाज में भय का माहौल पैदा करता है। अदालत ने 19 सितंबर को ही अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, समाज में कड़ा संदेश देने के लिए ऐसे जघन्य अपराधों में उचित सजा देना जरूरी है। इसके बाद कोर्ट ने दोनों दोषियों को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया था और आज अंतिम सजा का ऐलान कर दिया गया है। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि समाज की ऐसी के अंत के फांसी देना ही उचित दंड है.












