पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर राज लागू होते ही बिगड़े हालात, इमरान खान के समर्थकों और पुलिस के बीच तेज झड़प

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नई दिल्ली: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में गवर्नर राज लागू होने के बाद हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। मंगलवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के समर्थकों और पुलिस के बीच कई जगहों पर हिंसक झड़पें हुईं। इस दौरान कई लोग घायल हो गए, जबकि पुलिस ने 50 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी है। प्रांत में सुरक्षा और राजनीतिक हालात को लेकर तनाव बढ़ गया है।

पांच लोग घायल

सबसे गंभीर घटना पेशावर से करीब 15 किलोमीटर दूर बारा इलाके में हुई। यहां प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव में कम से कम पांच लोगों के घायल होने की खबर है। PTI के स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। पार्टी ने पुलिस पर सीधे गोली चलाने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई को अत्याचार बताया।

हालांकि, प्रांतीय प्रशासन की सूचना अधिकारी समर हारून बिलौर ने पुलिस फायरिंग के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर AI से तैयार वीडियो फैलाए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और आतंकवाद से जुड़े आरोपों में 50 PTI समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी का पता नहीं

राजनीतिक तनाव के बीच खैबर पख्तूनख्वा के पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को लेकर भी विवाद गहरा गया है। उनके भाई मोहम्मद आमिर ने पेशावर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर उनकी बरामदगी की मांग की है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि नकाबपोश और हथियारबंद लोग पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में सोहेल अफरीदी को अपने साथ ले गए। परिवार ने दावा किया कि तीन दिन बीतने के बाद भी उन्हें अदालत में पेश नहीं किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

शहबाज शरीफ ने गवर्नर राज को सही ठहराया

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर राज लागू करने के फैसले का बचाव किया है। उनका कहना है कि आतंकवाद और उग्रवाद पर काबू पाने में नाकामी के कारण केंद्र को यह कदम उठाना पड़ा। शहबाज ने PTI की पिछली प्रांतीय सरकार पर भी आतंकवाद के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए। वहीं, केंद्र सरकार ने उपप्रधानमंत्री इशाक डार के नेतृत्व में 11 सदस्यीय समिति गठित की है, जो प्रांत की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर नजर रखेगी। फिलहाल, गवर्नर राज के बाद राजनीतिक टकराव और बढ़ने के आसार हैं।

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