नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच शांति समझौते को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं हुई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश अमेरिकी शांति प्रस्ताव पर अगले कुछ दिनों में अपना जवाब देगा। उनके इस बयान से उम्मीद जगी है कि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ सकती है। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंच पाएंगे या नहीं।
मध्यस्थों के जरिए जारी है बातचीत
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर कोशिशें जारी हैं। ईरान के विदेश मंत्री के मुताबिक, दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान मध्यस्थों के जरिए हो रहा है। इसका मतलब है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है।
सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, अराघची ने बताया कि ईरान ने अमेरिका के सामने अपना प्रस्ताव रखा था। इसे ‘सेवन-डे प्लान’ यानी सात दिन की योजना का नाम दिया गया है। इसके साथ ही ईरान ने अमेरिकी पक्ष की ओर से रखे गए विचारों को भी सुना है। हालांकि, अराघची ने न तो इस योजना की पूरी शर्तें बताईं और न ही अमेरिकी प्रस्ताव को लेकर ईरान के अंतिम फैसले का खुलासा किया। ऐसे में फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि दोनों देशों के बीच सहमति बनने की दिशा में कितनी प्रगति हुई है।
क्या युद्ध रोकने पर बन सकती है सहमति?
अमेरिकी प्रस्ताव पर ईरान का जवाब आने वाले दिनों में बातचीत की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। अगर दोनों देश कुछ प्रमुख शर्तों पर सहमत होते हैं, तो तनाव कम करने और युद्ध रोकने की कोशिशों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
दूसरी ओर, अगर दोनों पक्षों के बीच प्रस्ताव की शर्तों को लेकर मतभेद बने रहते हैं, तो समझौते तक पहुंचने में और समय लग सकता है। इसलिए ईरान के जवाब को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजरें बनी हुई हैं।
अब सबकी नजर ईरान के जवाब पर
अराघची के बयान से साफ है कि ईरान ने बातचीत की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। लेकिन केवल बातचीत जारी रहने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि शांति समझौता जल्द हो जाएगा। अब देखना होगा कि ईरान अमेरिकी प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाता है और इसके बाद वॉशिंगटन की प्रतिक्रिया कैसी रहती है। दोनों देशों के फैसले ही तय करेंगे कि कूटनीतिक प्रयास किसी समझौते की ओर बढ़ते हैं या तनाव बरकरार रहता है।











