नई दिल्ली: हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित विशेष पर्व है. भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होने वाला यह उत्सव अनंत चतुर्दशी तक चलता है. इस दौरान घरों और पंडालों में गणपति की स्थापना होती है. मान्यता है कि गणेश जी की आराधना से बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि आती है. इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी. पूजा में दूर्वा चढ़ाने की परंपरा भी खास मानी जाती है. मान्यता है कि गणेश जी को दूर्वा प्रिय है और 108 दूर्वा चढ़ाने से उनकी कृपा मिलती है.
गणेश जी को दूर्वा अर्पित करते समय उसकी ताजगी और सफाई का ध्यान रखें. पूजा के लिए हरी और ताजी दूर्वा लें. सूखी, मुरझाई या गंदी दूर्वा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इसे साफ पानी से धो लें. 108 अलग-अलग दूर्वा चढ़ा सकते हैं. या 21-21 दूर्वा की पांच गांठों के साथ 3 दूर्वा और जोड़ सकते हैं. दूर्वा को मूर्ति पर फेंकने के बजाय आदर के साथ अर्पित करें.
पूजा की थाली में इन सामग्री को करें शामिल
गणेश चतुर्थी की पूजा से पहले सभी जरूरी सामग्री तैयार कर लें. अभिषेक के लिए पंचामृत, गंगाजल या साफ पानी रखें. साथ में चंदन, रोली, अक्षत, ताजे फूल, धूप और देसी घी का दीपक रखें. भोग में मोदक, लड्डू या गुड़ चढ़ाया जा सकता है. सामग्री व्यवस्थित होने पर पूजा आसान रहती है. अंत में आरती करें, भोग लगाएं और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें और दूसरों में भी बांटें.
इस विधि से अर्पित करें 108 दूर्वा
गणेश चतुर्थी की सुबह स्नान करके पूजा स्थान साफ करें. सूर्य देव को अर्घ्य देकर गणपति पूजा शुरू करें. प्रतिमा को साफ पात्र में स्थापित कर पंचामृत से स्नान कराएं. फिर शुद्ध जल या गंगाजल से अभिषेक करें. प्रतिमा को साफ कपड़े से पोंछकर वस्त्र पहनाएं. इसके बाद चंदन, रोली और अक्षत अर्पित करें. अब साफ की गई दूर्वा गणेश जी को चढ़ाएं. इसे मस्तक, सूंड या चरणों के पास रखना उचित माना जाता है. इस दौरान गणपति मंत्र का जाप करें.
दूर्वा के साथ भूलकर भी ना करें लापरवाही
दूर्वा अर्पित करते समय स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है. इसे जमीन पर रखने, गंदे हाथों से उठाने या बिना धोए भगवान को चढ़ाने से बचें. मुरझाई या अशुद्ध दूर्वा भी इस्तेमाल न करें. यदि 108 दूर्वा चढ़ाने का संकल्प है, तो उन्हें पहले ही गिनकर अलग रख लें. जल्दबाजी से बचें और मन को पूजा में लगाए रखें.
विधिपूर्वक पूजा से बरसेगी बप्पा की कृपा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर श्रद्धा से पूजा करने और प्रिय दूर्वा अर्पित करने से बप्पा प्रसन्न होते हैं. गणपति को विघ्नहर्ता माना जाता है और उनकी पूजा जीवन की बाधाओं से राहत की कामना से जुड़ी है. मान्यता है कि उनकी कृपा से रुके काम पूरे होने की राह आसान होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है.












