उत्तर प्रदेश में कुदरत का कहर, बाढ़ के पानी में डूबा यूपी, 8 मौतों से मचा हाहाकार, चित्रकूट में गिरे 565 मकान, गांवों में घुसा सैलाब

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कुदरत का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मूसलाधार बारिश और बांधों से लगातार छोड़े जा रहे पानी ने प्रदेश के बड़े हिस्से को भीषण बाढ़ की आगोश में धकेल दिया है। गंगा, यमुना, मंदाकिनी, टोंस, बेलन, सरयू, घाघरा और शारदा नदियां उफान मार रही हैं, जिससे तटीय इलाकों में हाहाकार मचा है। सैकड़ों गांवों का संपर्क बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट चुका है, जबकि हजारों एकड़ में फैली फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो गई हैं। जिले भर में अब तक 565 से अधिक कच्चे मकान ढह चुके हैं। पीड़ितों के लिए राहत सामग्री और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई जा रही है, हालांकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में हालात अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं।

हादसों में आठ जिंदगियां खामोश

बारिश और बाढ़ के बीच चित्रकूट, इटावा, बांदा, सीतापुर, बाराबंकी और संभल जिलों में हुए जानलेवा हादसों ने आठ लोगों की जिंदगी छीन ली। 
चित्रकूट में कच्चे मकान का मलबा गिरने से 32 वर्षीय कल्लू यादव और उनके दो मासूम बच्चों, पांच साल के अंश व एक साल की गुड़िया की दबकर मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में कल्लू की पत्नी और एक बेटी जिंदगी और मौत से जूझ रही हैं। 

सैकड़ों गांव जलमग्न

अन्य जिलों में भी तबाही के निशान साफ दिख रहे हैं। इटावा में बिजली गिरने से 12वीं के होनहार छात्र दिव्यांश रावत की मौत हो गई, तो संभल में भी आकाशीय बिजली की चपेट में आने से बने हालात और छत से गिरकर एक बुजुर्ग महिला की जान चली गई। बांदा में तेज हवाओं और बारिश के कारण पेड़ गिरने से एक बाइक सवार की मौत हुई, वहीं सीतापुर व बाराबंकी में कच्ची दीवारें ढहने से दो अन्य लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

रामघाट समेत 16 गांव डूबे

चित्रकूट की मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ से प्रसिद्ध रामघाट समेत 16 गांव जलमग्न हैं। नदियां खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं। हालांकि 29 अगस्त को नदी का जलस्तर 135.200 मीटर के रिकॉर्ड स्तर को छू चुका था, लेकिन पिछले 48 घंटों से यह 129 मीटर के आसपास बना हुआ है, जो खतरे के मानक (126.500 मीटर) से बहुत अधिक है। विपदा की इस घड़ी में प्रशासन मुस्तैद दिख रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में एनडीआरएफ और स्थानीय राहत-बचाव दलों की तैनाती की गई है। रामघाट सहित पानी से घिरे अन्य इलाकों में फंसे लोगों को नावों और सुरक्षित माध्यमों से बाहर निकाला जा रहा है। पीड़ितों के लिए राहत सामग्री और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई जा रही है, हालांकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में हालात अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं।

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