लारक स्ट्राइक के बाद बड़ा तनाव, जॉर्डन में अमेरिकी सेना पर भीषण हमला

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US strikes Iran
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नई दिल्ली: रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिरोध भीषण रूप ले चुका है। अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के लारक द्वीप पर मौजूद दो मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाकर सटीक एयरस्ट्राइक की। वाशिंगटन का दावा है कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) इन लॉन्चरों के जरिए मुख्य समुद्री मार्ग में बारूदी खदानें तैनात करने की फिराक में था।

अमेरिका की इस सैन्य कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने तीखा पलटवार किया। IRGC ने आधिकारिक बयान जारी कर जॉर्डन के किंग हुसैन और अल-अजरक स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागने की पुष्टि की। ईरानी मीडिया के अनुसार, लारक द्वीप पर हुए अमेरिकी हमले में उनके कई सैन्यकर्मी और आम नागरिक हताहत हुए थे, जिसके प्रतिशोध में यह भीषण हमला किया गया।

अमेरिका की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और लारक स्ट्राइक

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई। अमेरिका ने हाल ही में इस मार्ग से समुद्री बारूदी खदानें हटाने का अभियान पूरा किया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि जलडमरूमध्य में नई खदानें बिछाने की कोशिश करने वाले किसी भी पोत या लॉन्चर को तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा।

अमेरिकी अधिकारियों का क्या कहना है

जुलाई के अंत के बाद ईरान की मुख्य भूमि के पास अमेरिकी सेना का यह पहला बड़ा सीधा हमला है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे पूरे इलाके पर निगरानी रख रहे हैं और वाणिज्यिक जहाजों की बेरोक-टोक आवाजाही बहाल रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।  

जॉर्डन में धमाके और ईरान की चेतावनी  दूसरी ओर, ईरान की अर्द्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम और सरकारी प्रसारक IRIB ने बताया कि जॉर्डन में अमेरिकी एयरबेस पर हुए मिसाइल हमलों ने तकनीकी और रखरखाव से जुड़ी संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। IRGC के प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका को लारक द्वीप पर किए गए दुस्साहस की कीमत सैन्य और आर्थिक, दोनों मोर्चों पर चुकानी होगी। हालांकि, शुरुआती अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों का दावा है कि अधिकांश ईरानी मिसाइलों को हवाई रक्षा प्रणालियों ने हवा में ही नष्ट कर दिया। 

सातवें महीने में प्रवेश कर चुके इस क्षेत्रीय संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है और ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया है। होर्मुज में ताजा सैन्य वृद्धि से खाड़ी क्षेत्र में व्यापक युद्ध छिड़ने की आशंकाएं और गहरा गई हैं।

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