मोबाइल देखते हुए खाना खा रहे बच्चे तो हो जाएं सावधान, बढ़ा रहा है इस बीमारी का खतरा

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बच्चों को खाना खिलाते समय मोबाइल फोन देना आजकल आम बात हो गई है. रोते हुए बच्चे को शांत करने से लेकर उसे थोड़ी देर बिजी रखने तक स्क्रीन एक आसान तरीका लगता है. लेकिन अब डॉक्टर और रिसर्चर साफ चेतावनी दे रहे हैं. स्क्रीन एक्सपोजर खासकर एक साल से कम उम्र के बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है और तीन साल की उम्र तक ऑटिज्म जैसे लक्षण होने का खतरा बढ़ा सकता है.

रिसर्च से क्या पता चला?

AIIMS, दिल्ली और दूसरे इंस्टीट्यूशन के रिसर्चर ने पाया है कि छोटे बच्चे डिजिटल स्क्रीन के असर के प्रति बहुत ज्यादा सेंसिटिव होते हैं. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से तीन साल की उम्र तक बिल्कुल दूर रखना चाहिए. डॉक्टर यह भी साफ करते हैं कि स्क्रीन टाइम और क्लिनिकल ऑटिज्म के बीच सीधा कारण-और-प्रभाव वाला रिश्ता साबित नहीं हुआ है, लेकिन “वर्चुअल ऑटिज्म” जैसे लक्षण होने की संभावना जरूर बढ़ सकती है.

रायपुर के AIIMS के रिसर्चर्स ने पांच साल से कम उम्र के 2,857 बच्चों का मेटा-एनालिसिस किया. इससे पता चला कि बच्चों का एवरेज स्क्रीन टाइम हर दिन 2.22 घंटे था, जो वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की बताई गई डेली लिमिट से लगभग दोगुना है. माता-पिता अक्सर अपने बच्चों को शांत करने गुस्सा कंट्रोल करने या बस खुद को कुछ समय देने के लिए स्क्रीन टाइम का सहारा लेते हैं. इस तरीके से तुरंत आराम मिलता है लेकिन लंबे समय में बच्चे के मेंटल डेवलपमेंट पर असर पड़ सकता है.

एक और स्टडी में ऑटिज्म वाले 150 बच्चे और 3 से 18 साल के 50 नॉर्मल बच्चे शामिल थे. इस रिसर्च में न सिर्फ स्क्रीन एक्सपोजर पर बल्कि डिवाइस एडिक्शन और इसके साइकोलॉजिकल और बिहेवियरल असर पर भी फोकस किया गया. यह एक क्रॉस-सेक्शनल स्टडी थी जिसका मतलब है कि बच्चों के डेटा का एनालिसिस एक ही समय पर किया गया था इसलिए लंबे समय के असर पूरी तरह से समझ में नहीं आए हैं.

नतीजे क्या थे?

रिसर्च में पाया गया है कि ऑटिज्म के लक्षण वाले बच्चे कम उम्र में ज्यादा स्क्रीन एक्सपोजर लेते हैं. हालांकि शुरुआती स्क्रीन टाइम और ऑटिज्म के बीच एक मजबूत लिंक पाया गया, लेकिन इसे सीधा कारण नहीं माना गया.

ऑटिज्म कौन सी बीमारी है?

ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल कंडीशन है जो बच्चे के कम्युनिकेशन और सोशल बिहेवियर पर असर डालती है. शुरुआती सालों में दिमाग तेजी से डेवलप होता है, जिससे यह एक जरूरी समय बन जाता है. इसके लक्षणों में आई कॉन्टैक्ट की कमी बोलने में देरी और पहले सीखी हुई जानकारी को भूल जाना शामिल है.

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