Rama Ekadashi 2026: कब है रमा एकादशी? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पारण का समय

0
9

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत खास महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली रमा एकादशी को सबसे खास माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है, क्योंकि लक्ष्मी जी को ही रमा कहा जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर, गुरुवार को रखा जाएगा। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। पंचांग के मुताबिक, एकादशी तिथि 4 नवंबर को सुबह 11 बजकर 3 मिनट पर शुरू होगी और 5 नवंबर को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार व्रत 5 नवंबर को रखा जाएगा।

रमा एकादशी 2026 के जरूरी मुहूर्त

साल 2026 में रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर, गुरुवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 4 नवंबर को सुबह 11 बजकर 3 मिनट पर शुरू होगी और 5 नवंबर को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगी। वहीं, व्रत का पारण 6 नवंबर, शुक्रवार को किया जाएगा। दिल्ली के पंचांग के अनुसार, पारण का शुभ समय सुबह 6 बजकर 37 मिनट से 8 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। ये सभी समय दिल्ली के पंचांग पर आधारित हैं। अन्य शहरों में स्थानीय सूर्योदय के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है।

रमा एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रमा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से पुण्य मिलता है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन और अन्य वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है। माता लक्ष्मी को रमा नाम से भी जाना जाता है, इसलिए इस दिन दोनों की साथ में पूजा की जाती है। भक्त परिवार की खुशहाली और आर्थिक उन्नति की कामना करते हैं।

रमा एकादशी की पूजा विधि और व्रत के नियम

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के मंदिर की सफाई करके भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें। पूजा में भगवान को पीले फूल, चंदन, फल और तुलसी दल अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की आरती करें। व्रत रखने वाले भक्त अपनी क्षमता के अनुसार निर्जला या फलाहार कर सकते हैं। इस दिन चावल, गेहूं और दूसरे अनाज खाने से बचने की परंपरा है। हालांकि, बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को कठिन व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here