नई दिल्ली: एक हाथ में राजधानी की सुरक्षा की जिम्मेदारी और दूसरे हाथ में देश के लिए पदक जीतने का जुनून… जब खाकी के जवानों ने खेल के मंच पर कदम रखा तो उनकी मेहनत ने इतिहास लिख दिया। अपराधियों के खिलाफ मोर्चा संभालने वाली दिल्ली पुलिस के जवानों ने बॉडी बिल्डिंग के मंच पर भी अपनी ताकत, अनुशासन और जज्बे का ऐसा प्रदर्शन किया कि पहली ही दस्तक में ओवरऑल विजेता ट्रॉफी दिल्ली पुलिस के नाम हो गई।
ड्यूटी में खाकी का फर्ज, मंच पर बाजुओं का दम, पहली ही दस्तक में दिल्ली पुलिस का परचम
हरियाणा के मधुबन स्थित पुलिस परिसर में 23 से 27 सितंबर 2026 तक 75वीं अखिल भारतीय पुलिस बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का आयोजन ऑल इंडिया पुलिस स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड की ओर से किया गया था। देशभर के विभिन्न पुलिस बलों और सुरक्षा बलों के खिलाड़ियों के बीच हुई इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में दिल्ली पुलिस ने पहली बार अपने बॉडी बिल्डरों को मैदान में उतारा।पहली बार प्रतियोगिता में उतरने के बावजूद दिल्ली पुलिस के खिलाड़ियों ने ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरा मंच तालियों से गूंज उठा। दिल्ली पुलिस ने एक स्वर्ण पदक, दो कांस्य पदक और ओवरऑल विजेता ट्रॉफी अपने नाम कर इतिहास रच दिया।
नरेंद्र यादव ने 100 किलोग्राम भार वर्ग में जीता स्वर्ण
दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल नरेंद्र यादव, जो वर्तमान में द्वारका क्राइम ब्रांच में तैनात हैं, ने 100 किलोग्राम भार वर्ग में दमदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी शानदार उपलब्धि ने दिल्ली पुलिस के अभियान को ऐतिहासिक बना दिया। नरेंद्र यादव के प्रदर्शन ने न केवल व्यक्तिगत स्तर पर दिल्ली पुलिस को गौरवान्वित किया बल्कि उनके स्वर्ण पदक के साथ टीम ने ओवरऑल विजेता ट्रॉफी पर भी कब्जा जमाया।
कुलदीप और मोहम्मद शाहिद ने भी दिखाया दम
दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल कुलदीप ने 100 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। वहीं हेड कांस्टेबल मोहम्मद शाहिद, जो दिल्ली पुलिस मुख्यालय में तैनात हैं, ने 85 किलोग्राम भार वर्ग में अपनी ताकत और फिटनेस का शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया।तीनों खिलाड़ियों की इस सफलता ने दिल्ली पुलिस के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया।
12 साल की मेहनत ड्यूटी के बाद भी नहीं रुका अभ्यास
इन पदकों के पीछे केवल प्रतियोगिता के कुछ दिनों की तैयारी नहीं बल्कि करीब 12 वर्षों की तपस्या, कड़ी मेहनत और लगातार अभ्यास की कहानी है। ड्यूटी की जिम्मेदारियों के साथ शरीर को तराशना, नियमित अभ्यास करना, फिटनेस बनाए रखना और प्रतियोगिता के स्तर के अनुरूप खुद को तैयार करना आसान नहीं था। लेकिन इन जवानों ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो वर्दी की जिम्मेदारी खेल के जुनून के रास्ते में दीवार नहीं बनती।
दिन में खाकी का फर्ज…
ड्यूटी के बाद पसीने से तरबतर अभ्यास…
और फिर मंच पर देश और दिल्ली पुलिस के लिए पदक की जंग।
यही वह जज्बा है जिसने दिल्ली पुलिस को पहली ही भागीदारी में अखिल भारतीय स्तर पर शीर्ष सम्मान दिलाया।
डीसीपी द्वितीय बटालियन संदीप व्याला के मार्गदर्शन में बढ़ा हौसला
दिल्ली पुलिस के द्वितीय बटालियन के डीसीपी संदीप ब्याला की देखरेख मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से खिलाड़ियों को अभ्यास तथा प्रतियोगिता की तैयारियों में लगातार हौसला मिला। इंचार्ज आजम खान सहित संबंधित अधिकारियों के सहयोग और मार्गदर्शन ने भी खिलाड़ियों की तैयारी को मजबूती दी। वरिष्ठ अधिकारियों ने पदक विजेता खिलाड़ियों को उनकी शानदार उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनकी मेहनत, अनुशासन समर्पण और दृढ़ संकल्प की सराहना की।
खाकी ने दिया संदेश फर्ज भी फिटनेस भी और फतह भी
दिल्ली पुलिस के जवानों की यह उपलब्धि केवल तीन पदकों तक सीमित नहीं है। यह उस सोच की तस्वीर है, जिसमें पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के साथ खेल और फिटनेस के क्षेत्र में भी आगे बढ़ने का अवसर और प्रोत्साहन दिया जा रहा है। मंच पर जब दिल्ली पुलिस का नाम पुकारा गया तो वहां केवल खिलाड़ियों की जीत नहीं थी, बल्कि उन हजारों पुलिसकर्मियों के जज्बे की जीत थी, जो दिन-रात राजधानी की सुरक्षा में डटे रहते हैं। एक तरफ कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी… दूसरी तरफ शरीर को फौलाद बनाने की मेहनत। एक तरफ अपराधियों से मुकाबला… दूसरी तरफ खेल के अखाड़े में प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती।और जब नतीजा आया तो ट्रॉफी दिल्ली पुलिस के नाम थी।












