अमेरिका में भारतीय मूल की नित्या रमन का बड़ा उलटफेर, लॉस एंजेलिस की मेयर बनीं; कैरेन बास को हराया

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अमेरिका के प्रमुख महानगरों में शामिल लॉस एंजेलिस को अब नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। भारत में जन्मीं नित्या रमन ने मेयर पद के चुनाव में मौजूदा डेमोक्रेटिक नेता कैरेन बास को शिकस्त देकर सबको चौंका दिया। चुनाव से पहले नित्या को जीत का प्रबल दावेदार नहीं माना जा रहा था, लेकिन प्रचार अभियान के दौरान उन्हें लगातार समर्थन मिलता गया और अंततः उन्होंने बाजी अपने नाम कर ली। इस जीत के साथ वह शहर की पहली दक्षिण एशियाई मेयर बनने जा रही हैं। उनकी सफलता को अमेरिका में भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नित्या का संबंध डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट ऑफ अमेरिका से है।

इसी संगठन से न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी भी जुड़े हुए हैं। नित्या रमन की जीत के बाद अमेरिका के दो बड़े शहरों की राजनीति में डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट विचारधारा से जुड़े नेताओं का प्रभाव चर्चा में आ गया है। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी भी डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट ऑफ अमेरिका यानी DSA के सदस्य हैं। यह संगठन अमेरिका में समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने वाला राजनीतिक आंदोलन है, हालांकि इसे औपचारिक रूप से पंजीकृत राजनीतिक पार्टी का दर्जा हासिल नहीं है। नित्या की सफलता को इस विचारधारा से जुड़े राजनीतिक अभियान की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

कैरेन बास ने स्वीकार की चुनावी हार

मौजूदा मेयर कैरेन बास को चुनाव में कई प्रभावशाली डेमोक्रेटिक नेताओं का समर्थन मिला हुआ था। कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम, पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और पूर्व हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी उनके समर्थन में खड़े थे। इसके बावजूद वह चुनाव जीतने में सफल नहीं हो सकीं। गुरुवार को कैरेन बास ने अपनी हार स्वीकार कर ली। उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि नित्या रमन से फोन पर उनकी बातचीत हुई है। अपने संदेश में बास ने कहा कि नतीजा उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा, लेकिन लॉस एंजेलिस के मतदाताओं ने अपना फैसला सुना दिया है।

केरल में जन्मीं, छह साल की उम्र में अमेरिका पहुंचीं

नित्या रमन का जन्म भारत के केरल में हुआ था। जब वह छह वर्ष की थीं, तब उनका परिवार अमेरिका चला गया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने शहरी विकास और नियोजन के क्षेत्र में काम किया। राजनीति में प्रवेश से पहले वह अर्बन प्लानर के तौर पर काम कर चुकी थीं। वर्ष 2020 में उन्होंने लॉस एंजेलिस सिटी काउंसिल का चुनाव जीता और परिषद की सदस्य बनीं। स्थानीय प्रशासन में काम करने के दौरान उन्हें शहर की बुनियादी समस्याओं और नागरिकों की जरूरतों को समझने का अवसर मिला।

पहले कैरेन बास की सहयोगी थीं नित्या

इस चुनाव की एक दिलचस्प बात यह भी रही कि नित्या रमन पहले कैरेन बास की सहयोगी रह चुकी थीं। उन्होंने शुरुआती दौर में बास के चुनाव अभियान का समर्थन भी किया था। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी राजनीतिक राह अलग कर ली और नामांकन की समयसीमा समाप्त होने से कुछ समय पहले खुद चुनाव लड़ने का फैसला किया। नित्या का कहना था कि लॉस एंजेलिस ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां शहर को नई दिशा और बदलाव की जरूरत है। शुरुआत में उनकी उम्मीदवारी को कमजोर माना गया, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें मतदाताओं का समर्थन मिलने लगा।

बेघर लोगों और आवास संकट को बनाया चुनावी मुद्दा

नित्या रमन ने चुनाव प्रचार के दौरान शहर की उन समस्याओं को प्रमुखता दी, जिनका सामना आम नागरिक लंबे समय से कर रहे हैं। उनके एजेंडे में बेघर लोगों की बढ़ती संख्या, किफायती मकानों की कमी और हॉलीवुड में रोजगार के अवसरों में गिरावट जैसे विषय शामिल थे। इसके अलावा उन्होंने आव्रजन से जुड़ी सख्त नीतियों को लेकर भी अपनी राय रखी। उनका चुनावी अभियान शहर में बदलाव लाने और स्थानीय लोगों की परेशानियों को प्राथमिकता देने के संदेश पर आधारित था।

2025 की भीषण आग ने भी बदला चुनावी माहौल

लॉस एंजेलिस में वर्ष 2025 के दौरान लगी भीषण आग का मुद्दा भी चुनाव में अहम रहा। इस आपदा में कई लोगों की जान चली गई थी और बड़े इलाके में घर तथा बस्तियां नष्ट हो गई थीं। आग के समय तत्कालीन मेयर कैरेन बास विदेश में थीं। उनकी गैरमौजूदगी को लेकर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। चुनाव प्रचार के दौरान यह मामला फिर से उठा और उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े किए गए। नित्या रमन की जीत के बाद अब शहर के लोगों की निगाहें उनके चुनावी वादों पर हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह आवास, बेघर लोगों और रोजगार से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए क्या कदम उठाती हैं।

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