नई दिल्ली: नेपाल में आई अचानक बाढ़ और सैलाब ने कई इलाकों में तबाही मचा दी. कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे भारतीय तीर्थयात्रियों ने वहां के डरावने हालात बयां किए. यात्रियों के मुताबिक, कुछ पल ऐसे थे जब उन्हें लगा कि अब बचना मुश्किल है. चारों तरफ पानी, मलबा और टूटते पहाड़ दिखाई दे रहे थे.
मौत से महज 100 मीटर दूर था सैलाब
नेपाल से दिल्ली लौटे एक भारतीय तीर्थयात्री ने बताया कि बुधवार सुबह अचानक बाढ़ का पानी तेजी से उनकी तरफ बढ़ने लगा. सैलाब इतनी तेजी से आया कि लोगों को संभलने तक का समय नहीं मिला. उन्होंने बताया कि पानी उनसे करीब 100 मीटर दूर था और जान बचाने के लिए वह तुरंत सुरक्षित जगह की ओर भागे. तीर्थयात्री ने कहा कि उस समय उन्हें सिर्फ अपनी जान बचाने की चिंता थी. उन्होंने इसे भगवान की कृपा बताया कि वह सुरक्षित बाहर निकल सके.
रास्ते बंद, जमीन खिसकने लगी
यात्रियों ने बताया कि वे बेहद दुर्गम इलाके में फंस गए थे. कई रास्ते पानी और मलबे की वजह से बंद हो चुके थे. कहीं जमीन खिसक रही थी तो कहीं पहाड़ से लगातार मलबा नीचे आ रहा था. लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि सुरक्षित जगह आखिर कौन सी है.
ऐसे मुश्किल वक्त में नेपाल सेना ने राहत अभियान चलाया और फंसे भारतीयों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया. इसके बाद यात्रियों की भारत वापसी संभव हो सकी.
आंखों के सामने बह गया पूरा इलाका
नेपाल में काम कर रहे एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि वह पहाड़ की ऊंचाई पर खड़े थे. अचानक तेज आवाज के साथ पानी और मलबे का बड़ा सैलाब नीचे की ओर आने लगा. देखते ही देखते इमारतें और सड़कें इसकी चपेट में आ गईं.
उन्होंने बताया कि मजदूर और स्थानीय लोग जान बचाने के लिए ऊंचाई की ओर भागने लगे. कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका चीख-पुकार से भर गया. यह मंजर इतना भयावह था कि वह खुद भी सदमे में गिर पड़े.
कई परिवारों के अपने अब भी लापता
बाढ़ ने नेपाल के कई बाजारों और बस्तियों को मलबे में बदल दिया है. प्रभावित इलाकों में लोग अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं. एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि उसके परिवार के करीब 40 सदस्य लापता हैं और उन्हें अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि वे कहां हैं.
शवगृहों में भी जगह की कमी
तबाही के बाद राहत और बचाव दल के सामने एक और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. बड़ी संख्या में शव बरामद होने के कारण स्थानीय मॉर्चरी में जगह कम पड़ रही है. अधिकारियों को शवों को सुरक्षित रखने और पहचान की प्रक्रिया के लिए अस्थायी इंतजाम करने पड़ रहे हैं.












