यमन पर सऊदी अरब का बड़ा हमला, 3 बच्चों की मौत, हूती विद्रोहियों ने 124 मौतों का दिया आंकड़ा

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में शनिवार को हिंसा की दो बड़ी घटनाएं सामने आईं। एक तरफ यमन में हवाई हमले में तीन बच्चों की मौत का दावा किया गया है, तो दूसरी तरफ वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों के लोगों के हमले में एक पत्रकार गंभीर रूप से घायल हो गईं। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने आरोप लगाया है कि यमन के दक्षिण-पश्चिमी धमार प्रांत में सऊदी अरब के हवाई हमले में तीन बच्चों की मौत हो गई। हूती नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, शुक्रवार को धावरान अनेस जिले के अल-अर गांव में रिहायशी घरों को निशाना बनाया गया। इस हमले में 8 साल का एक बच्चा और 10 साल के दो बच्चों की जान चली गई, जबकि एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए।

हूती ने सऊदी अरब को ठहराया जिम्मेदार 

हूती समूह ने इसके लिए सीधे सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया है, हालांकि रियाद की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी बलों के बीच लड़ाई फिर तेज हो गई है। हूती स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि सितंबर में संघर्ष दोबारा शुरू होने के बाद से उनके नियंत्रण वाले इलाकों में अब तक 124 लोगों की मौत हो चुकी है।

वेस्ट बैंक में वॉशिंगटन पोस्ट की फोटोग्राफर पर हमला

दूसरी घटना कब्जे वाले वेस्ट बैंक की है, जहां इजरायली बस्तियों के लोगों के हमले में घायल वॉशिंगटन पोस्ट की फोटोग्राफर हाइडी लेविन की शनिवार को सर्जरी करनी पड़ी। उनकी बेटी एशले मिलनर ने बताया कि हमले में लेविन की बाएं हाथ की एक उंगली लगभग कट गई, घाव हड्डी तक पहुंच गया था। इसके अलावा उनकी एक पसली और रीढ़ की कई हड्डियां टूट गई हैं।

शुक्रवार को बस्तियों के लोगों ने वेस्ट बैंक के कई फिलिस्तीनी गांवों में हमला किया, कारों और जैतून के पेड़ों में आग लगा दी और स्थानीय लोगों के साथ पत्रकार को भी पीटा। यह हिंसा सालाना जैतून की फसल कटाई के दौरान हुई।

हमलावरो के पास थे बोतलें और गुलेल 

लेविन ने बताया कि हमलावरों के पास बोतलें और गुलेल थीं और उन्होंने करीब 10 मिनट तक उन्हें लातों से मारा। हेलमेट और ‘प्रेस’ लिखे सुरक्षा कवच की वजह से उनकी जान बच गई। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल फिलिस्तीनियों के खिलाफ बस्तियों के लोगों की हिंसा बढ़ी है, खासकर 27 अक्टूबर को होने वाले इजरायल चुनाव से पहले। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि इजरायली अधिकारी इन हमलों को रोकने में नाकाम रहे हैं।

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