Lifestyle Update: किशोरावस्था दिमाग के विकास और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण समय होता है। हाल ही में किशोरों पर की गई एक दिलचस्प रिसर्च से एक बहुत ही आसान और प्रभावी बात सामने आई है। रिसर्च के मुताबिक किशोर जितना ज्यादा रोजाना पैदल चलते हैं, ठीक एक साल बाद उनमें मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं उतनी ही कम देखने को मिलती हैं। यह अध्ययन बताता है कि शारीरिक गतिविधि और मानसिक सेहत के बीच गहरा और सीधा संबंध है।
मानसिक स्वास्थ्य में होता है सुधार
रिसर्च के नतीजों की पुष्टि न्यूरोइमेजिंग के जरिए भी हुई है। एक रिसर्च में जिन किशोरों ने सबसे ज्यादा कदम चले, उनके दिमाग के कुछ खास हिस्सों में ‘कार्टिकल टिश्यू’ ज्यादा मोटा पाया गया। ये हिस्से शरीर की मूवमेंट और भावनाओं को कंट्रोल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यानी पैदल चलना न केवल शरीर के लिए, बल्कि दिमाग के विकास के लिए भी बेहद लाभकारी है। यह देखना बहुत उत्साहजनक है कि शारीरिक गतिविधि से दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को सीधा फायदा मिलता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह स्थिति “सब या कुछ नहीं” वाली नहीं है। इसका मतलब है कि ये फायदे हासिल करने के लिए किशोरों का बेहतरीन एथलीट होना बिलकुल जरूरी नहीं है।
खेलों और शारीरिक गतिविधियों के लिए करें प्रोत्साहित
अगर कोई किशोर अपने रोजाना के कदमों में सिर्फ 1,000 से 2,000 कदम और जोड़ लेता है, तो भी उसके दिमाग की बनावट और मानसिक स्वास्थ्य में काफी बेहतर नतीजे देखने को मिल सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि कदमों की संख्या बढ़ने के साथ यह फायदेमंद प्रभाव भी लगातार बढ़ता रहता है। अध्ययन से यह साफ होता है कि किशोरों को रोजाना अधिक से अधिक पैदल चलने के लिए प्रेरित करना उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। माता-पिता और स्कूलों को चाहिए कि वे बच्चों को खेलों और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि वे स्वस्थ दिमाग और बेहतर मानसिक सेहत के साथ आगे बढ़ सकें।












