जयशंकर-रुबियो बैठक में गूंजा कड़ा संदेश, भारत-अमेरिका ने पाकिस्तान-ईरान पर बढ़ाया दबाव

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India-US Relation
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नई दिल्ली के ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस में शनिवार को भारत और अमेरिका के बीच कूटनीति का एक नया अध्याय लिखा गया. भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अपने पहले भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक ने वैश्विक मंच पर एक बड़ा संदेश दिया है. इस बैठक ने न केवल दोनों देशों के बीच गहराते रक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग को रेखांकित किया, बल्कि आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर ईरान को भी कड़ा रुख दिखाया.

आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता

साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद को दोनों देशों के लिए सबसे बड़ी साझा चुनौती बताया. उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, जयशंकर और रुबियो का आतंकवाद के खिलाफ यह साझा रुख सीधे तौर पर पाकिस्तान को संदेश है कि भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद को अब वैश्विक स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अमेरिका ने एक बार फिर साबित किया है कि आतंक के खिलाफ लड़ाई में वह पूरी तरह भारत के साथ खड़ा है.

ईरान पर अमेरिका का सख्त रुख

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान को लेकर वाशिंगटन के रुख को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया. उन्होंने दो टूक कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा.

इसके साथ ही, वैश्विक व्यापार के लिहाज से बेहद संवेदनशील ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को लेकर रुबियो ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि इस समुद्री मार्ग को बिना किसी टोल या टैक्स के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए पूरी तरह खुला रहना चाहिए, ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित न हो.

भारत-अमेरिका का संबंध

मार्को रुबियो ने भारत को अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक बताते हुए कहा कि यह संबंध केवल औपचारिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं. यह एक बेहद ठोस और मजबूत रणनीतिक साझेदारी है, जिसे आगे बढ़ाना दोनों देशों की प्राथमिकता है.

वहीं, एस. जयशंकर ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि भारत-अमेरिका के संबंध अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है. आज के जटिल दौर में दोनों देशों का यह बढ़ता तालमेल वैश्विक शांति और संतुलन बनाए रखने में सबसे अहम भूमिका निभाएगा.

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