खाड़ी में हूती तनाव के बीच पाकिस्तान ने सऊदी में बढ़ाई सैन्य ताकत, क्या बढ़ेगा टकराव?

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नई दिल्ली: लाल सागर में हूती विद्रोहियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच सऊदी अरब ने सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। सऊदी अरब के समर्थन वाली यमनी सेना ने हूतियों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। इस बीच खबर है कि पाकिस्तान भी सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए अपनी सेना की और तैनाती करने जा रहा है।

बड़े पैमाने पर सैन्य जुटाने की तैयारी 

न्यूज 18 ने सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस्लामाबाद नए मक्का रक्षा समझौते के तहत बड़े पैमाने पर सैन्य जुटाने की योजना बना रहा है। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब सऊदी समर्थित यमनी सेना ने सऊदी एयरफोर्स की मदद से बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के आसपास हूतियों पर जोरदार हमला किया। बता दें,  यह समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के सबसे व्यस्त और अहम जलमार्गों में से एक है।

सैन्य के साथ मिल सकती है हथियारों की मदद 

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान सऊदी अरब को सैनिकों के साथ-साथ हथियारों की भी मदद दे सकता है, क्योंकि रियाद पर हूती हमले लगातार बढ़ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इस तैनाती में पाकिस्तान की थल सेना, वायु सेना और नौसेना के साथ मिसाइल और रॉकेट यूनिट भी शामिल हो सकती है। हालांकि कितने सैनिक भेजे जाएंगे और उनकी भूमिका क्या होगी, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

यह फैसला 5 अक्टूबर को रियाद में हुई मक्का रक्षा गठबंधन की आपात बैठक के बाद लिया गया। इस बैठक में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की शामिल हुए थे। तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा समझौते को तुरंत लागू करने और सऊदी अरब में तय सैन्य बलों को जल्द भेजने पर सहमति जताई। संयुक्त बयान में सैनिकों की संख्या या हथियारों का जिक्र नहीं किया गया।

पाकिस्तान क्या भूमिका निभाएगा?

सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी सेना सऊदी इलाके और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा कर सकती है, जबकि पाकिस्तानी नौसेना लाल सागर और बाब अल-मंडेब के पास सऊदी हितों की रक्षा में तैनात हो सकती है। तोप, रॉकेट, ड्रोन और कम दूरी की मिसाइलें देने की भी चर्चा है। हालांकि इस्लामाबाद और रियाद दोनों ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी एयरफोर्स भी सऊदी ऑपरेशन में मदद कर सकती है, लेकिन यमन के अंदर हवाई हमलों में पाकिस्तान की सीधी भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

अगस्त में हुआ था मक्का रक्षा समझौता

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने अगस्त में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता सामूहिक सुरक्षा का ढांचा देता है, जिसके तहत एक सदस्य पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा। अब तीनों देश इसे जमीनी सैन्य कार्रवाई में बदलने पर राजी हो गए हैं।

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