चंडीगढ़: पंजाब को प्रदूषण मुक्त बनाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों का सकारात्मक असर धरातल पर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पिछले तीन वर्षों के दौरान पराली जलाने की घटनाओं में 86 प्रतिशत की ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है। इस सफलता को और आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री मान ने राज्यभर में गांव और ब्लॉक स्तर पर एक व्यापक सूचना व जन-जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया है। चंडीगढ़ में पराली प्रबंधन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को खेत में ही या खेत से बाहर पराली प्रबंधन (इन-सीटू और एक्स-सीटू) के आधुनिक व स्थायी विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए।
तीन वर्षों में 86 प्रतिशत घटीं पराली जलाने की घटनाएं
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि राज्य सरकार के सुनियोजित प्रयासों का ही नतीजा है कि 2023 से 2025 के दौरान पराली जलाने के मामलों में अप्रत्याशित गिरावट आई है। साल 2023 में जहां पराली जलाने के 36,663 मामले सामने आए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 10,909 और 2025 में घटकर मात्र 5,114 रह गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष पंजाब में लगभग 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की बुआई हुई है, जिससे करीब 18.81 मिलियन टन पराली पैदा होने का अनुमान है। सरकार का लक्ष्य है कि इस सीजन में पराली जलाने के मामलों को न्यूनतम स्तर पर लाया जाए।
एनजीओ, समाजसेवियों और पंचायतों की ली जाएगी मदद
इस अभियान को मात्र एक सरकारी कार्यक्रम न बनाकर एक जन-आंदोलन का रूप देने के लिए मान सरकार ने गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), समाजसेवियों और ग्राम पंचायतों को साथ जोड़ने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जमीनी स्तर पर किसानों को जागरूक करने के लिए कृषि मशीनों के जीवंत प्रदर्शन, नुक्कड़ नाटक, सरपंचों के साथ बैठकें और शपथ ग्रहण समारोह जैसे आयोजनों का आयोजन किया जाए। इसके अतिरिक्त, जो पंचायतें, किसान और प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां (पैक्स) अपने क्षेत्रों में शून्य-पराली जलाने का लक्ष्य हासिल करेंगी, उन्हें राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक रूप से सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से पहुंचेगा संदेश
किसानों तक सटीक जानकारी पहुंचाने के लिए सरकार ने व्यापक डिजिटल रणनीति भी तैयार की है। टेलीविजन, रेडियो जिंगल्स, प्रिंट मीडिया और मोबाइल एसएमएस के अलावा सोशल मीडिया का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कृषि और विज्ञान-प्रौद्योगिकी विभाग मिलकर काम करें ताकि किसानों को उपलब्ध आधुनिक कृषि यंत्रों की सही जानकारी मिल सके। इस बैठक में कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, हरदीप सिंह मुंडियां और मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।











