रतिया: शक्ति नाटक क्लब रतिया द्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर गुरुद्वारा ग्राउंड,शक्ति नगर में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला में शनिवार रात्रि को रामलीला मंचन के नोवै दिन सीता हरण और बाली वध का सीन दर्शाया गया। रामलीला मंचन में मुख्य अतिथि के तहत व्यापार मंडल के प्रधान दर्शन गर्ग, पूर्व प्रधान अमन जैन , प्रमुख समाज सेवी संजय मोदी ने शिरकत की। गण मन अतिथियों के तहत होली विजडम कन्वेंट स्कूल लाली के संचालक राज कंबोज, रूप गर्ग, राजू डेरी के संचालक राजू दाहूजा, नीलकंठ डाक कावड़ संघ प्रधान रमन बलाना, चेयरमैन कमल अरोड़ा व उनकी टीम , सचिन तनेजा ,अरुण डोडा, पंकज बजाज, संतलाल तनेजा,सेवक खीपल मौजूद रहे।
मारीच के स्वर्ण मृग बनने से श्रीराम कुटिया से हुए दूर
रामलीला मंचन के आठवें दिन रावण माता सीता का हरण करने के लिए मारीच के साथ मिलकर मायावी चाल चलता है और मारीच को एक सूंदर हिरण बनाकर पंचवटी के बाहर भेजता है। माता सीता सुंदर स्वर्ण मृग को देखकर भगवान श्रीराम से उसे पकड़कर लाने का आग्रह करती हैं। श्रीराम मृग को पकड़ने के लिए उसके पीछे वन में चले जाते हैं। काफी दूर जाने के बाद श्रीराम के बाण से घायल मारीच उनकी आवाज में पुकारता है, “हा लक्ष्मण! हा सीते!” माता सीता यह आवाज सुनकर चिंतित हो जाती हैं और लक्ष्मण से श्रीराम की सहायता के लिए जाने को कहती हैं। लक्ष्मण उन्हें समझाते हैं कि श्रीराम पर कोई संकट नहीं आ सकता, लेकिन माता सीता के बार-बार आग्रह करने पर वे उनकी रक्षा की चिंता करते हुए कुटिया छोड़कर चले जाते हैं।
साधु के वेश में रावण ने किया सीता हरण, जटायु से हुआ युद्ध
लक्ष्मण के जाते ही रावण साधु का वेश धारण करके कुटिया के पास आता है। वह माता सीता से भिक्षा मांगता है। माता सीता साधु को भिक्षा देने के लिए आगे आती हैं। रावण उन्हें अपने छल में फंसाकर अपने वास्तविक रूप में आ जाता है और उनका हरण कर पुष्पक विमान अथवा रथ से लंका की ओर ले जाने लगता है। इस दौरान माता सीता भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को पुकारती हैं तथा रावण से उन्हें छोड़ने की विनती करती हैं। माता सीता की पुकार सुनकर पक्षीराज जटायु रावण का रास्ता रोकते हैं। जटायु रावण को समझाते हैं कि पराई स्त्री का हरण करना अधर्म है। रावण उनकी बात नहीं मानता और दोनों के बीच भयंकर युद्ध होता है। जटायु पूरी शक्ति से रावण का सामना करते हैं, लेकिन रावण उनके पंख काट देता है। जटायु घायल होकर धरती पर गिर जाते हैं और रावण माता सीता को लेकर लंका चला जाता है।
श्रीराम का सीता की खोज में निकलना
जब भगवान श्रीराम और लक्ष्मण कुटिया लौटते हैं, तो माता सीता को वहां न पाकर व्याकुल हो जाते हैं। दोनों वन में उन्हें खोजते हुए आगे बढ़ते हैं। रास्ते में उन्हें घायल जटायु मिलते हैं। जटायु उन्हें बताते हैं कि रावण माता सीता का हरण करके दक्षिण दिशा की ओर ले गया है। वहां पर उन्हें हनुमान और सुग्रीव मिलते हैं जहां भगवान श्री राम सुग्रीव को पूरी जानकारी देते हैं वही सुग्रीव भी अपने बारे में बताता है कि उसका राजपाठ उसके भाई बाली ने छीन लिया है जिस पर भगवान श्री राम सुग्रीव को बाली से युद्ध करने के लिए भेजते हैं और छिपकर बाली पर तीर मारते हैं।
श्रीराम के बाण से घायल हुआ बाली
श्रीराम का बाण लगने से बाली घायल होकर धरती पर गिर जाता है। वह भगवान श्रीराम से प्रश्न करता है कि उन्होंने सामने आकर युद्ध करने के बजाय छिपकर बाण क्यों चलाया।भगवान श्रीराम बाली को उसके आचरण का स्मरण कराते हैं। रामकथा की परंपरागत व्याख्या में बाली द्वारा अपने छोटे भाई सुग्रीव के साथ अन्याय करना और उसकी पत्नी को अपने अधिकार में रखना उसके दंड का प्रमुख कारण बताया जाता है। श्रीराम धर्म और न्याय की स्थापना के लिए अपने निर्णय को उचित ठहराते हैं।
अतिथियों को पटका पहनाकर किया सम्मानित
मुख्य अतिथियों को , पंजाबी सभा अध्यक्ष सतीश हांडा, कृष्ण तनेजा, सतीश चोपड़ा शक्ति नाटक क्लब के कमेटी प्रधान राजेश सेतिया ,रवि मिढा,अंशुल बत्रा, सचिन ललित , करनैल सिंह,अनिल रूखया, प्रिंस कालू तनेजा, शटी कक्कड़, रमेश जताना ,विजय तनेजा,दीपू चिलाना,आशु तनेजा,सोनू चिलाना,मनोहर लाल,टीटू तनेजा सहित समस्त कार्यकारिणी ने पटका पहनाकर व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
Reported By: Rimpi Jindal












