नई दिल्ली: गणेश चतुर्थी के दिन पूरे विधि-विधान से घर में बप्पा की स्थापना करने के बाद अब हर घर में विसर्जन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। कुछ परिवार अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति को विदा करते हैं, तो कुछ अपनी पुरानी मान्यताओं के अनुसार पहले ही बप्पा को विसर्जित कर देते हैं। इस साल 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के साथ ही बप्पा की स्थापना हुई थी, इस हिसाब से 19 सितंबर छठा दिन बनता है। लेकिन पंचांग की परंपराओं के अनुसार गणेश विसर्जन के लिए तीसरा, पांचवां, सातवां दिन और अनंत चतुर्दशी का दिन ही सबसे शुभ माना जाता है। इसलिए 19 सितंबर की जगह 20 सितंबर यानी सातवें दिन बप्पा को विदा करना ज्यादा शुभ रहेगा।
20 सितंबर 2026 को गणेश विसर्जन के लिए कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। सुबह के समय चर, लाभ और अमृत मुहूर्त 07:40 से 12:14 बजे तक रहेगा। दोपहर में शुभ मुहूर्त 13:46 से 15:17 बजे तक है। शाम के समय शुभ, अमृत और चर मुहूर्त 18:20 से 22:46 बजे तक रहेगा। इसके अलावा रात में लाभ मुहूर्त 21 सितंबर की तड़के 01:43 से 03:12 बजे तक और उषाकाल में शुभ मुहूर्त 04:40 से 06:09 बजे तक रहेगा।
क्या सिर्फ पुरुष ही कर सकते हैं विसर्जन?
यह एक आम धारणा है कि गणेश विसर्जन सिर्फ पुरुष ही कर सकते हैं, लेकिन शास्त्रों में ऐसा कोई नियम नहीं बताया गया है। अगर घर में महिलाएं गणपति की पूजा करती आई हैं, तो वे भी उत्तर पूजा में शामिल होकर प्रतिमा को विदाई दे सकती हैं। इसी तरह बच्चे भी विधि-विधान से बप्पा की पूजा करके उन्हें विदा कर सकते हैं। असल में धार्मिक दृष्टि से सबसे जरूरी चीज है श्रद्धा, स्वच्छता और सही विधि का पालन करना।
विसर्जन से पहले क्यों जरूरी है उत्तर पूजा
गणपति को विदा करने से पहले उत्तर पूजा और आरती की परंपरा निभाई जाती है। इसे गणेशोत्सव की आखिरी और विदाई पूजा माना जाता है। इस पूजा में सबसे पहले गणपति की प्रतिमा के सामने दीप जलाया जाता है, फिर उन्हें फूल, अक्षत, दूर्वा, धूप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद आरती करके परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है और स्थापना के समय लिए गए संकल्प को पूर्ण मानते हुए बप्पा को श्रद्धापूर्वक विदाई दी जाती है। इसके बाद प्रतिमा को सम्मान के साथ विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है। बता दें कि इस साल अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को पड़ रही है, जिसे गणेश विसर्जन का सबसे प्रमुख दिन माना जाता है।












