नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। अब उन्हें भी प्राइवेट स्कूलों जैसी सुविधाएं मिलने वाली हैं। योगी सरकार ने राज्य के हजारों परिषदीय स्कूलों को हाईटेक बनाने का बड़ा प्लान तैयार किया है, जिसमें बच्चे डिजिटल तरीके से पढ़ाई कर सकेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लखनऊ में हुई कैबिनेट बैठक में एक अहम फैसला लिया गया। इस बैठक में 14,429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में तैयार करने को मंजूरी दे दी गई।
इस पूरी योजना पर सरकार 300 करोड़ रुपये खर्च करेगी। अब इन स्कूलों में बच्चों को स्मार्ट क्लास, लैब, डिजिटल किताबें और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं मिलेंगी, वहीं टीचरों को भी टैबलेट दिए जाएंगे।
चरणों में होगा काम, कंपनी को मिली जिम्मेदारी
इस योजना को एक साथ नहीं बल्कि धीरे-धीरे अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। स्मार्ट क्लास बनाने की जिम्मेदारी श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड नाम की कंपनी को दी गई है, जो इस पूरे काम को अंजाम देगी। इसके लिए टेंडर प्रतिस्पर्धा के आधार पर निकाला जाएगा। हर स्कूल के लिए 2 लाख 7 हजार 910 रुपये की दर तय की गई है, जिसमें सर्विस चार्ज और जीएसटी भी जुड़ा हुआ है। अगर टेंडर में यह रेट कम आता है, तो तय बजट में और भी ज्यादा स्कूलों को स्मार्ट बनाया जा सकेगा।
पहले से चल रही हैं कई सुविधाएं
बता दें कि यूपी के लिए डिजिटल शिक्षा कोई नई बात नहीं है। राज्य में पहले से ही 32 हजार से ज्यादा स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज चलाई जा रही हैं। इसके साथ ही 15 हजार से अधिक स्कूलों में आईसीटी लैब भी बनाई जा चुकी है, जबकि 1,129 स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी शुरू हो चुकी है। अब तक 2.61 लाख से ज्यादा शिक्षकों को टैबलेट भी बांटे जा चुके हैं। गौरतलब है कि यूपी के प्राथमिक स्कूलों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत साल 2021 में हुई थी, लेकिन इसका नियमित रूप से संचालन शैक्षणिक सत्र 2022-23 से हो पाया। अब सरकार स्मार्ट स्कूल योजना के जरिए डिजिटल शिक्षा को और आगे ले जाना चाहती है, ताकि सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी आधुनिक और तकनीक आधारित पढ़ाई का पूरा मौका मिल सके।











