आज मनाई जा रही मासिक दुर्गाष्टमी, सावन में पड़ने से बढ़ा पर्व का धार्मिक महत्व

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Durga Ashtami
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नई दिल्ली: आस्था के महीने सावन में आज यानी 20 अगस्त को मासिक दुर्गाष्टमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है, और इस बार यह तिथि सावन में पड़ने के चलते श्रद्धालुओं के लिए दोगुना खास बन गई है। सनातन परंपरा में देवी दुर्गा को आदिशक्ति और समस्त विघ्नों का नाश करने वाली शक्ति के रूप में पूजा जाता है। कहा जाता है कि जो भक्त निर्मल भाव से जगदंबा की शरण में जाता है, मां उसके जीवन की हर बाधा दूर कर उसे संघर्ष का साहस देती हैं। स्नान के बाद दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हुए बीज मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै’ का 108 बार जप करने की परंपरा है।

कब से कब तक रहेगी शुभ तिथि

पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 19 अगस्त की शाम 7:19 बजे से शुरू हो चुकी है और यह आज रात 9:18 बजे तक रहेगी। व्रत आज गुरुवार को ही रखा जा रहा है। 

पूजा के लिए मुहूर्त सुबह 11:37 से दोपहर 12:27 बजे तक सबसे शुभ माना जा रहा है, जबकि शाम को आराधना करने वाले भक्त 6:55 से 7:17 बजे के गोधूलि बेला में दीप जलाकर पूजन कर सकते हैं।

भोग और कन्या पूजन की विधि

स्नान के बाद दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हुए बीज मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै’ का 108 बार जप करने की परंपरा है। भोग में हलवा, पूरी और काले चने अर्पित किए जाते हैं, इसके बाद दो से दस वर्ष तक की बालिकाओं को घर बुलाकर भोजन करवाया जाता है और उन्हें उपहार देकर विदा किया जाता है। हालांकि पूजा में नींबू, इमली, सूखा नारियल, नाशपाती और अंजीर जैसे फल चढ़ाने से बचना चाहिए, साथ ही कटे-फटे या बासी फल अर्पित करना भी शास्त्रों में वर्जित माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन पान के पत्ते पर गुलाब की सात पंखुड़ियां रखकर देवी को अर्पित करने से घर का क्लेश शांत होता है। मां को लाल रंग विशेष प्रिय माना जाता है, इसलिए लाल गुड़हल या कनेर के फूलों के साथ लाल चुनरी और सिंदूर चढ़ाने की परंपरा है। शाम के समय गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाना भी बेहद शुभ फलदायी बताया गया है। पूजा में दो लौंग जलते दीपक में डालकर देवी के सामने रखने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होकर सकारात्मकता का संचार होता है।

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