साइबर ठगों का देशभर में फैला मायाजाल, 70 बैंक खाते और 187 फर्जी सिम कार्ड का खुलासा

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नई दिल्ली: साइबर अपराध की दुनिया में ठगों ने ऐसा जाल बिछाया था, जिसकी जड़ें हैदराबाद से लेकर जालंधर तक फैली हुई थीं। कहीं बीमा और नौकरी का झांसा देकर बैंक खाते खरीदे जा रहे थे तो कहीं ग्राहकों के दस्तावेजों पर उनकी जानकारी के बिना सिम कार्ड जारी कराए जा रहे थे। इन खातों और सिम कार्डों के सहारे देशभर में साइबर ठगी की रकम का खेल चल रहा था। आउटर नॉर्थ जिला पुलिस ने चार बड़े मामलों का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार कर इस नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। आउटर नॉर्थ जिला पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त-प्रथम लोकेश्वरन आर ने बताया कि जांच में करीब 70 बैंक खातों और वर्ष 2026 में जारी कराए गए 187 सिम कार्ड का नेटवर्क सामने आया है।

पहला खेल: बैंक खातों की मंडी

शाहबाद डेयरी इलाके में सक्रिय गिरोह लोगों को बीमा लाभ, नौकरी और आर्थिक फायदे का लालच देकर बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद एटीएम कार्ड, चेकबुक और खाते की पूरी किट साइबर अपराधियों को सौंप दी जाती थी। इस मामले में देवेंद्र उर्फ सचिन गिरफ्तार हुआ है, जबकि उसका साथी मोहित तिहाड़ जेल में बंद है।

दूसरा खेल: दस्तावेजों से फर्जी सिम

सिम कार्ड विक्रेता अतुल पर ग्राहकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनकी जानकारी के बिना अतिरिक्त वोडाफोन-आइडिया सिम जारी कराने का आरोप है। इन सिम कार्डों को करीब 1,500 रुपये में समीर और पंकज को बेचा जाता था। इस मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।

तीसरा और चौथा मामला: करोड़ों का हिसाब

तीसरे मामले में सुमित ने कथित तौर पर अपने तीन बैंक खाते 20 हजार रुपये में विक्की चौहान को सौंपे थे। वहीं, जालंधर से गिरफ्तार सौरव के मोबाइल में 29 बैंक खातों, 85 डेबिट-क्रेडिट कार्ड और 10 गुप्त पहचान वाले कार्डों का विवरण मिला। उस पर करीब 3.73 करोड़ रुपये की संदिग्ध ठगी की रकम संभालने का संदेह है। उसकी 500 वर्ग गज की बेकरी फैक्ट्री और महिंद्रा एक्सयूवी-700 भी जांच के दायरे में हैं।

125 शिकायतें, 1.59 करोड़ की ठगी

पुलिस के मुताबिक चारों मामलों से जुड़ी 125 शिकायतों में करीब 1.59 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है। आठ मोबाइल फोन, आठ एटीएम कार्ड, नकदी, चेकबुक, पासबुक, पीओएस मशीन और यामाहा आर15एम मोटरसाइकिल बरामद की गई है। चार बैंक खाताधारकों और एक डाककर्मी को भी पाबंद किया गया है। राहत की बात यह है कि शिकायतकर्ताओं को 1.12 करोड़ रुपये वापस कराए जा चुके हैं। पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और रकम के लेन-देन की कड़ियां खंगाल रही है।

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