नई दिल्ली: इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच मलेशिया सरकार ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने ऐलान किया है कि 1 जून से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल पहले जितना आसान नहीं रहेगा. नए नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नाबालिग बच्चे बिना उम्र सत्यापन के अकाउंट न बना सकें.
सरकार का कहना है कि यह फैसला बच्चों को साइबर बुलिंग, ऑनलाइन ठगी और इंटरनेट पर मौजूद अश्लील कंटेंट से बचाने के लिए लिया गया है. डिजिटल दुनिया में बढ़ते खतरों को देखते हुए मलेशिया का यह कदम अब वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है.
टेक कंपनियों के लिए सख्त हुए नियम
अब तक सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर ढिलाई बरतने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन मलेशिया का कम्युनिकेशंस एंड मल्टीमीडिया कमीशन अब इस मामले में पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है. नए नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को और मजबूत करना होगा. कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों तक हानिकारक या आपत्तिजनक सामग्री आसानी से न पहुंचे.
AI से बने वीडियो और फोटो पर भी रहेगी नजर
मलेशिया सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कंटेंट को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है. अब AI की मदद से बनाए गए या एडिट किए गए वीडियो और तस्वीरों को बिना लेबल के प्लेटफॉर्म पर दिखाने की अनुमति नहीं होगी. सरकार का मानना है कि फेक वीडियो और मॉर्फ्ड कंटेंट तेजी से लोगों को गुमराह कर रहे हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर बच्चों और किशोरों पर पड़ता है.
नियम तोड़ने पर कंपनियों को झेलनी पड़ सकती है कार्रवाई
अगर टेक कंपनियां नए नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उन्हें मलेशिया में संचालन को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. सरकार ने साफ कर दिया है कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सोशल मीडिया कंपनियों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, क्योंकि अब उन्हें अपनी नीतियों और तकनीक में बड़े बदलाव करने पड़ेंगे.
उम्र सत्यापन तकनीक पर भी काम शुरू
सरकार फिलहाल ऐसे एज वेरिफिकेशन सिस्टम पर काम कर रही है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर केवल तय उम्र के लोग ही अकाउंट बना सकें. हालांकि इस कदम को लेकर प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर बहस भी शुरू हो गई है, लेकिन सरकार का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है.
ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के बाद मलेशिया भी सख्त
ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देशों में पहले ही बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सख्त नियम लागू किए जा चुके हैं. अब मलेशिया ने भी संकेत दे दिया है कि डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकारें अब और ज्यादा कठोर कदम उठाने को तैयार हैं.
अभिभावकों की जिम्मेदारी भी बढ़ी
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ सरकार या सोशल मीडिया कंपनियां ही नहीं, बल्कि माता-पिता को भी बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत है. तकनीक की तेजी से बदलती दुनिया में बच्चों का सुरक्षित बचपन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.
डिजिटल अनुशासन की ओर बढ़ता कदम
मलेशिया का यह फैसला दिखाता है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर और भी कड़े नियम देखने को मिल सकते हैं. बच्चों को सुरक्षित डिजिटल माहौल देना अब दुनियाभर की सरकारों की प्राथमिकता बनता जा रहा है.














